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छत्तीसगढ़

ओवरटाइम घोटाला : 115 करोड़ के कथित फर्जी भुगतान मामले में ACB-EOW की जांच तेज, दो गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में CSMCL से जुड़े कथित 115 करोड़ रुपये के ओवरटाइम भुगतान घोटाले की जांच ACB-EOW कर रही है। आरोप है कि 2019-20 से 2023-24 के बीच शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर फर्जी ओवरटाइम दिखाकर भुगतान स्वीकृत कराया गया, लेकिन असल में पैसा कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा और निजी एजेंसियों व अन्य लोगों के बीच बांट दिया गया। ED की कार्रवाई के बाद मामले का खुलासा हुआ, जिसमें नकदी बरामदगी से जांच आगे बढ़ी। अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है और डिजिटल व बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच जारी है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Apr 2026, 10:07 AM
रायपुर

छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के बाद अब एक और बड़े वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी सिस्टम और निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB-EOW) ने करीब 115 करोड़ रुपए के कथित “ओवरटाइम भुगतान घोटाले” का पर्दाफाश किया है। 

इस पूरे मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई से हुई थी। 29 नवंबर 2023 को रायपुर में ED ने तीन संदिग्ध व्यक्तियों के पास से 28.80 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। शुरुआती जांच में यह रकम संदिग्ध लगी, लेकिन जब इसकी गहराई से पड़ताल की गई तो पता चला कि यह पैसा शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान से जुड़ा हुआ है।

ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB-EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच के दौरान मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनी ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसी कड़ी में ACB ने कंपनी के फील्ड ऑफिसर अभिषेक कुमार सिंह और अकाउंटेंट तिजऊ राम निर्मलकर को गिरफ्तार किया है। दोनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

ACB के अनुसार, इन दोनों का मुख्य काम कंपनी के बैंक खाते से बड़ी रकम निकालना और उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना था। ED द्वारा जब्त की गई नकदी भी इसी नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही है।

घोटाले का तरीका

जांच में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य सरकार ने शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए लगभग 115 करोड़ रुपए का ओवरटाइम भुगतान स्वीकृत किया था। नियमों के मुताबिक, यह राशि सीधे उन कर्मचारियों को मिलनी चाहिए थी जिन्होंने अतिरिक्त समय में काम किया।

लेकिन मैनपावर एजेंसियों ने कागजों में फर्जी तरीके से ओवरटाइम दिखाया। कर्मचारियों के नाम पर भुगतान स्वीकृत कराया गया, लेकिन असल में यह पैसा उनके खातों तक पहुंचा ही नहीं। इसके बजाय इस रकम को कमीशन के रूप में निकालकर आपस में बांट लिया गया।

किसे मिला फायदा

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस घोटाले में शामिल रकम CSMCL के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों, निजी एजेंसियों और अन्य व्यक्तियों के बीच बांटी गई। इस पूरे मामले के तार कारोबारी अनवर ढेबर से भी जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।

आगे क्या

ACB-EOW अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। डिजिटल साक्ष्य, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि पूछताछ के दौरान कुछ बड़े अधिकारियों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

यह मामला न केवल आर्थिक घोटाले का है, बल्कि उन कर्मचारियों के साथ धोखे का भी है, जिनकी मेहनत की कमाई को सिस्टम के भीतर ही हड़प लिया गया। अब सबकी नजर इस पर है कि जांच एजेंसियां कितनी गहराई तक जाकर दोषियों को बेनकाब कर पाती हैं।

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