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घूस के जब्त रुपये ‘चूहे खा गए’ दलील पर सुप्रीम कोर्ट हैरान : पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल, महिला कर्मचारी की सजा पर रोक

भ्रष्टाचार के एक मामले में बिहार की पूर्व महिला अधिकारी अरुणा कुमारी को पटना हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेने पर 7 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 25 Apr 2026, 06:32 PM · अपडेट: 31 Oct 2026, 11:56 PM
दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में पटना हाईकोर्ट के फैसले पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Supreme Court of India ने एक महिला सरकारी कर्मचारी को राहत देते हुए उसकी सजा पर रोक लगा दी है और उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इस मामले में कोर्ट की टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसमें कहा गया कि जब्त की गई रिश्वत की रकम “चूहों द्वारा खा ली गई” — इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य और अविश्वास जताया है।

“चूहे नोट खा गए” वाली दलील पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि यह समझ से परे है कि न्यायिक प्रक्रिया में अहम सबूत इस तरह नष्ट हो गए और उसे सामान्य घटना मान लिया जाए। कोर्ट ने टिप्पणी की— “हम यह जानकर हैरान हैं कि करेंसी नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए। यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि ऐसे मामलों में जब्त नकदी कितनी सुरक्षित रहती है।” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं स्वीकार कर ली जाएं, तो भ्रष्टाचार मामलों में जब्त की गई रकम की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठ जाएगा।

10 हजार की घूस, 7 साल की सजा तक पहुंचा मामला

यह मामला बिहार सरकार की पूर्व बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी अरुणा कुमारी से जुड़ा है, जिन पर ₹10,000 रिश्वत लेने का आरोप था।

  • ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था
  • लेकिन Patna High Court ने बाद में उन्हें दोषी ठहराते हुए 7 साल की कठोर सजा सुनाई

हाईकोर्ट ने यह सजा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 1988) की धारा 7 और 13(2) के तहत दी थी।

  • धारा 7 के तहत 3 साल की सजा
  • धारा 13(2) के तहत 4 साल की सजा

सबूतों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल

इस मामले में सबसे विवादित पहलू जब्त नकदी का है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, जिस रकम को सबूत के रूप में रखा गया था, वह पुलिस मालखाने में रखरखाव की कमी के चलते कथित तौर पर चूहों द्वारा नष्ट कर दी गई।

हालांकि कोर्ट ने अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध किया, जिनमें शामिल थे—

  • मालखाना रजिस्टर में दर्ज एंट्री
  • रिश्वत की रकम से जुड़ी रसीद
  • लिफाफे की बरामदगी का रिकॉर्ड

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सबूतों का इस तरह नुकसान गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

“राज्य को राजस्व और न्याय दोनों का नुकसान”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं हो सकतीं। अदालत ने आशंका जताई कि—

  • कई मामलों में जब्त नकदी सुरक्षित नहीं रखी जाती
  • इससे न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है
  • बल्कि राज्य को आर्थिक नुकसान भी होता है

महिला कर्मचारी को बड़ी राहत

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरुणा कुमारी की सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा तय की गई सभी शर्तें जमानत पर लागू रहेंगी।

क्या है आगे की राह?

इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। अब यह देखना अहम होगा कि—

  • क्या सुप्रीम कोर्ट अंतिम सुनवाई में दोषसिद्धि को बरकरार रखता है या नहीं
  • और क्या सबूतों की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई सख्त दिशा-निर्देश जारी होते हैं

न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा संदेश

यह मामला सिर्फ एक भ्रष्टाचार केस नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में सबूतों के रखरखाव और सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अदालतें अब सबूतों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से ले रही हैं।

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