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छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान : सुकमा में 1.54 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी, 4990 मरीज चिन्हित
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। अब तक 1,54,157 लोगों की जांच पूरी हो चुकी है और 4,990 मरीज गंभीर बीमारियों के लिए चिन्हित किए गए हैं। नियद नेल्लानार क्षेत्र के 39 मरीजों को जिला अस्पताल लाकर उपचार, मोतियाबिंद ऑपरेशन, चश्मा वितरण और विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
सावधान... मनेन्द्रगढ़ में झोलाछाप डॉक्टरों पर चला स्वास्थ्य विभाग का डंडा, अवैध क्लीनिक सील, सामान जप्त
मनेन्द्रगढ़ के ग्राम भौता में स्वास्थ्य विभाग ने एक फर्जी डॉक्टर के अवैध क्लीनिक पर छापा मारकर उसे सील कर दिया। CMHO डॉ. अविनाश खरे के निर्देश पर गठित टीम को जांच में कोई वैध मेडिकल डिग्री या दस्तावेज नहीं मिले। मौके से इस्तेमाल की गई दवाइयां और इंजेक्शन जब्त किए गए। विभाग ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और जिले में ऐसे अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही है।
सेहत
बांग्लादेश : खसरे का भयानक प्रकोप,खसरा बना जानलेवा संकट, हजारों मासूम अस्पतालों में भर्ती, स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव
बांग्लादेश में खसरा का प्रकोप गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गया है। हजारों बच्चे संक्रमित होकर अस्पतालों में भर्ती हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम टीकाकरण, जागरूकता की कमी और शुरुआती लक्षणों की अनदेखी संक्रमण फैलने की बड़ी वजह है।खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, आंखों में लालिमा और शरीर पर लाल दाने शामिल हैं। डॉक्टरों ने समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। वहीं सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां टीकाकरण अभियान तेज कर संक्रमण रोकने की कोशिश में जुटी हैं।
शिक्षा
बंपर भर्ती : छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 5 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए 175 पदों पर आवेदन शुरू
छत्तीसगढ़ सरकार 5 नए मेडिकल कॉलेज (दंतेवाड़ा, कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कुनकुरी) शुरू करने के लिए 175 संविदा पदों पर भर्ती कर रही है। इसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट सहित मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्टाफ शामिल हैं। वेतन ₹1 लाख से ₹2.25 लाख प्रति माह तक होगा, और डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस की अनुमति भी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया 6 मई से 13 मई तक चलेगी और इंटरव्यू 15–16 मई को रायपुर में होंगे। यह भर्ती राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए की जा रही है।
शिक्षा
स्वास्थ्य ढांचे में बड़ी क्रांति : द्वारका में बनेगा अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज, सीएम ने दी 806 करोड़ की मंजूरी
दिल्ली सरकार ने द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में ₹805.99 करोड़ की लागत से एक आधुनिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल परियोजना को मंजूरी दी है। इस कॉलेज में शुरुआत 150 MBBS छात्रों से होगी और बाद में हर साल 250 सीटें उपलब्ध होंगी। परियोजना NMC मानकों के अनुसार विकसित की जाएगी और इसमें स्मार्ट, ग्रीन तथा भूकंपरोधी सुविधाएं होंगी। इससे द्वारका और बाहरी दिल्ली के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी तथा अस्पताल में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।
त्वरित समाधान : कौशिल्या साहू को हाथों-हाथ मिली स्वास्थ्य सुरक्षा की सौगात
सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत मोहतरा में आयोजित शिविर में कौशिल्या साहू को आवेदन करते ही तत्काल आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया। अधिकारियों ने मौके पर ही पात्रता जाँचकर ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और कार्ड प्रिंट कर सौंप दिया। कौशिल्या साहू ने इस त्वरित सुविधा के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रशासन का आभार जताया। ग्रामीणों ने शिविरों को सरकार की संवेदनशील और पारदर्शी कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया।
सेहत
कुपोषण और एनीमिया : बच्चों व महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट
भारत में कुपोषण और एनीमिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं, जिनका सबसे अधिक असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग और कमजोर विकास की समस्या व्यापक है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएँ एनीमिया से ग्रसित हैं। कुपोषण का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी, आयरन और पोषक तत्वों का अभाव, गरीबी, स्वच्छता की कमी और जागरूकता की कमी है। इसका प्रभाव बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य की उत्पादकता पर पड़ता है, वहीं महिलाओं में कमजोरी, गर्भावस्था की जटिलताएँ और मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ता है।
सेहत
मानसिक स्वास्थ्य संकट : युवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती, जानें कारण, लक्षण और समाधान
आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर और बढ़ती हुई समस्या बन चुका है, विशेषकर युवाओं और बच्चों में। पढ़ाई, करियर की प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, पारिवारिक तनाव और असंतुलित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। इसके चलते तनाव, चिंता, अकेलापन, नींद की कमी और आत्मविश्वास में गिरावट जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं, जो आगे चलकर अवसाद का रूप ले सकते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए खुलकर बातचीत, योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, संतुलित दिनचर्या और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग आवश्यक है। गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की मदद लेना भी जरूरी है।
सेहत
स्वास्थ्य संकट : जंक फूड और तनाव का असर, बढ़ती बीमारियों की सच्चाई
भारत में अब संक्रमण वाली बीमारियों की तुलना में लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, मोटापा, फैटी लिवर और थायरॉइड प्रमुख हैं। इसकी मुख्य वजहें गलत खानपान, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की कमी हैं। ये समस्याएँ अब युवाओं में भी तेजी से दिख रही हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।
सेहत
हृदय रोग : सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, हार्ट अटैक और दिल की बीमारियां, जानें कारण और बचाव
हृदय रोग आज के समय में एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और मोटापा है। यह अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रमुख प्रकारों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, अरिदमिया और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं, जो दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान, चक्कर आना और अनियमित धड़कन शामिल हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
स्वास्थ्य क्रांति : मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से दुर्गम गांवों तक पहुंची चिकित्सा सेवा, घर-घर जांच और जीवनरक्षक उपचार
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अब घर-घर जाकर मलेरिया, टीबी, सिकलसेल, शुगर जैसी बीमारियों की जांच और इलाज कर रहे हैं। अभियान के दौरान गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर जीवन बचाने जैसे उदाहरण सामने आए हैं, जिसमें लंबी दूरी तय कर त्वरित उपचार सुनिश्चित किया गया।
छत्तीसगढ़
आदेश बेअसर : ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, नहीं लौटे 52 स्वास्थ्यकर्मी, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग से बच रहे
महासमुंद जिले में संलग्नीकरण समाप्त करने के आदेश के बावजूद 52 स्वास्थ्यकर्मी अब तक अपने मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग नहीं दे रहे हैं। आदेश के 12 दिन बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सीएमएचओ ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।