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मोबाइल-लैपटॉप : बढ़ाई आंखों की परेशानी, तेजी से फैल रहा ड्राई आई सिंड्रोम
मोबाइल, लैपटॉप और लंबे स्क्रीन टाइम की वजह से ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंखों में जलन, खुजली, भारीपन और धुंधलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सावधानी और स्क्रीन टाइम नियंत्रित करके आंखों को इस समस्या से बचाया जा सकता है।
सेहत
मोबाइल फोन : घंटों मोबाइल चला रहे बच्चे, मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ रहा बुरा असर
मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रहा है। WHO और कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के अनुसार जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में बोलने में देरी, ध्यान की कमी, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया की लत बच्चों को वास्तविक दुनिया से दूर कर रही है, जिससे उनका व्यवहार और आत्मविश्वास भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करने, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने और घर में डिजिटल अनुशासन लागू करने की जरूरत है।
सेहत
याददाश्त : कमजोर होने के पीछे क्या हैं कारण? जानिए बचाव के तरीके
भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में लाखों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां और संतुलित आहार से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल, दूध, मछली और ओमेगा-3 युक्त भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।
लाइफ स्टाइल
Lifestyle : रात 8:30 बजे लाइट ऑफ... लेकिन उसके बाद क्या होता है? कल्कि का रूटीन हुआ वायरल
नींद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित समय पर सोना और उठना बेहद जरूरी है। इसके अलावा रात में स्क्रीन टाइम कम करना, कैफीन से बचना और शांत वातावरण बनाना भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद सिर्फ आराम नहीं बल्कि शरीर और दिमाग की रिकवरी का एक जरूरी हिस्सा है।
सेहत
स्वास्थ्य संकट : जंक फूड और तनाव का असर, बढ़ती बीमारियों की सच्चाई
भारत में अब संक्रमण वाली बीमारियों की तुलना में लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, मोटापा, फैटी लिवर और थायरॉइड प्रमुख हैं। इसकी मुख्य वजहें गलत खानपान, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की कमी हैं। ये समस्याएँ अब युवाओं में भी तेजी से दिख रही हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।