"पशुपालक" के लिए 41 परिणाम मिले
पशुपालन क्रांति की शुरुआत : धमतरी के भटगांव में स्थापित होगा अत्याधुनिक ब्रीडिंग एवं रिसर्च सेंटर
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भटगांव में राज्य का पहला “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर” स्थापित किया जा रहा है। कलेक्टर की पहल पर शुरू यह परियोजना पशुपालन को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक और आधुनिक व्यवसाय में बदलने का लक्ष्य रखती है। इस केंद्र में कृत्रिम गर्भाधान, पैथोलॉजी जांच, रोग निदान और उन्नत प्रयोगशाला जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे पशुओं की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़
गगरेल बांध का पानी बना वरदान : कुकरा के कठवा फाल में दिखा ‘मिनी भेड़ाघाट’ जैसा अद्भुत नजारा
छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच गंगरेल बांध (रविशंकर सागर) से महानदी मुख्य नहर के जरिए छोड़ा गया पानी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। इससे सूखे तालाब भर रहे हैं, भूजल स्तर बढ़ रहा है और पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध हो रहा है। कुकरा गांव के पास कठवा फाल में नहर का पानी लगभग 15 फीट की ऊंचाई से गिरकर सफेद झाग जैसा “दूधिया” दृश्य बना रहा है, जिसे लोग ‘मिनी भेड़ाघाट’ कह रहे हैं। यह मनमोहक दृश्य लोगों को आकर्षित कर रहा है और क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट के बड़े फैसले : छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी शुरू, महिलाओं को रजिस्ट्री में 50% छूट, सैनिकों को भी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने के लिए समिति गठन का निर्णय लिया गया। महिलाओं को संपत्ति रजिस्ट्री में 50% और सैनिकों को स्टाम्प शुल्क में 25% छूट दी गई। खनन नियमों में सख्ती, उद्योग को बढ़ावा देने के लिए संशोधन, रेत खदानों पर नियंत्रण, पशुपालन योजनाओं का विस्तार और मध्यप्रदेश से 8536 करोड़ रुपए की वापसी जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
बेहाल गौवंश : भीषण गर्मी में बिना चारा-पानी भटकते मवेशी, प्लास्टिक मिश्रित डस्ट बना सहारा; स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
महासमुंद के NH-353 क्षेत्र में चारे की कमी के चलते गौवंश राइस मिल की हानिकारक डस्ट खाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में पानी और छाया के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल चारा, पानी और संरक्षण की व्यवस्था की मांग की है।
छत्तीसगढ़
स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।