"सब्जियों की खेती" के लिए 11 परिणाम मिले
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Seva Sankalp Abhiyan: किसान समृद्धि योजना से बदली खेती, अब धान के साथ सब्जियों से भी बढ़ी आमदनी
Seva Sankalp Abhiyan: किसान समृद्धि योजना के तहत 43 हजार रुपये की अनुदान सहायता मिलने से किसान मनोज कुमार छेदैया के खेत में नलकूप और पंप की सुविधा विकसित हुई। इससे वर्षा पर निर्भरता कम हुई और समय पर सिंचाई संभव हो सकी। अब वे खरीफ सीजन के बाद भी अन्य फसलों की खेती कर अपनी कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।
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Chhattisgarh Agriculture: गाय पालन और सब्जी बाड़ी से बदली निधि तिवारी की जिंदगी, अब सालाना कमाई ढाई लाख रुपए
Chhattisgarh Agriculture: पेण्ड्रा विकासखंड की निधि तिवारी ने स्व सहायता समूह से जुड़कर पशुपालन और सब्जी बाड़ी को अपनी आजीविका का आधार बनाया। 10 हजार रुपये की सहायता से शुरू हुआ उनका सफर आज सालाना करीब ढाई लाख रुपये की आय तक पहुंच गया है। गाय पालन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
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Nutrition Garden: सुरक्षित खाद्य उत्पादन और आहार विविधता पर जोर, 62 किसानों ने लिया प्रशिक्षण
Nutrition Garden: आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर ने 62 किसानों के लिए पोषण वाटिका प्रशिक्षण आयोजित किया। किसानों को फलदार पौधे और 18 प्रकार की सब्जियों के बीज वितरित किए गए।
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बस्तर में कोसा उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी, 50 हितग्राहियों को मिलेगा प्रशिक्षण
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने बस्तर और कांकेर में ककून बैंक, धागाकरण केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने 50 हितग्राहियों को टसर कृमिपालन व धागाकरण प्रशिक्षण देने और सुकमा-दंतेवाड़ा में भी प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए।
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सौर सुजला योजना से बदली वनांचल की खेती, 4,722 किसानों के खेतों तक पहुंची सिंचाई सुविधा
छत्तीसगढ़ की सौर सुजला योजना नारायणपुर और बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्रों के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के तहत रियायती दरों पर सोलर सिंचाई पंप मिलने से किसानों की बिजली पर निर्भरता कम हुई है। अब वे बिना बिजली बिल और कटौती की चिंता के खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं।
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सरगुजा के किसान ने अपनाई आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई से मिली खेती को नई दिशा
सरगुजा जिले के किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना का लाभ लेकर ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाई है। इससे पानी, समय और श्रम की बचत के साथ टमाटर व गोभी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ा है। आधुनिक तकनीक से किसान खेती को अधिक लाभकारी और आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
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कूप निर्माण ने बदली किसान की किस्मत, बारिश पर निर्भर खेती से मिली सालभर सिंचाई की सुविधा
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के किसान अरुण की खेती में बड़ा बदलाव आया है। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन के तहत निजी भूमि पर बने कूप से उन्हें स्थायी सिंचाई सुविधा मिली। पहले बारिश पर निर्भर रहने वाले अरुण अब धान के साथ गेहूं और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। करीब 6.5 एकड़ जमीन में सालभर सिंचाई होने से उनकी आय 45 हजार रुपये से बढ़कर लगभग 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
बड़ी कामयाबी : महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी सुनीता खेती और उद्यम से बदली अपनी तकदीर
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड खैरागढ़ अंतर्गत ग्राम टेकापारकला की निवासी सुनीता वर्मा आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायी मिसाल बन चुकी हैं। कभी खेती-किसानी और मजदूरी के सहारे परिवार का भरण-पोषण करने वाली सुनीता वर्मा ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आत्मनिर्भरता की ऐसी कहानी लिखी,
किसानों के प्रेरणास्रोत : मेहनत का कमाल, छबी लाल ने लिखी सफलता की नई कहानी
ग्राम बेलौदी निवासी किसान छबी लाल ने वाटरशेड विकास योजना की मदद और वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी 1.5 एकड़ भूमि को सफल सब्जी उत्पादन मॉडल में बदल दिया है। कभी पानी की कमी और सीमित संसाधनों से जूझने वाले छबी लाल आज बरबट्टी, भिंडी, करेला, बैंगन और तोरई जैसी सब्जियों की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता से प्रभावित होकर ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव नरेन्द्र भूषण ने भी उनके खेत का दौरा कर सराहना की। छबी लाल की उपलब्धि अब क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।
आधुनिक कृषि : तकनीकी खेती से आत्मनिर्भर बने किसान महेश कश्यप
छत्तीसगढ़ के बिल्हा क्षेत्र के किसान महेश कश्यप ने उद्यानिकी विभाग की सहायता और आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और जैविक खाद का उपयोग कर पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने सब्जी उत्पादन विशेषकर बैंगन के साथ अंतरवर्ती फसलों की खेती कर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई। इससे उनकी आय में दोगुनी वृद्धि हुई और वे अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
छत्तीसगढ़
आजीविका डबरी बनी वरदान : बिसाहिन ने मछली पालन से बदली किस्मत, दोगुनी हुई आय
छत्तीसगढ़ के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम पहरनादादर की किसान बिसाहिन पहले वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थीं, जिससे उनकी आय सीमित थी। वर्ष 2025 में सरकारी योजना के तहत उनके खेत में लगभग 20×20 मीटर की आजीविका डबरी (कृषि तालाब) का निर्माण किया गया, जिसकी जल भंडारण क्षमता करीब 894 घन मीटर है। तालाब बनने के बाद उन्होंने मछली पालन शुरू किया और साथ ही रबी फसल व सब्जी उत्पादन भी करने लगीं। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उन्हें खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिला।