सेहत
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हेल्थ अलर्ट : भीषण गर्मी और उमस के बीच बढ़ा बीमारियों का खतरा, जानें खुद को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय
देश के कई हिस्सों में इस समय मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है—एक तरफ भीषण गर्मी और उमस, तो दूसरी तरफ प्री-मानसून बारिश। इस अचानक बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा डिहाइड्रेशन, हीट इंजरी, पेट के संक्रमण (फूड पॉइजनिंग, डायरिया), वायरल फीवर और त्वचा-आंखों के इंफेक्शन का है।
हॉस्टल फूड स्कैंडल : खाने में मिली गंदगी, छात्राओं की शिकायत पर मेस बंद
इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित मधुर गर्ल्स हॉस्टल में दूषित भोजन परोसे जाने का मामला सामने आया है। खराब भोजन खाने से 20 से अधिक छात्राएं बीमार पड़ गईं, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्राओं ने खाने में कीड़े, बाल और अन्य गंदगी मिलने की शिकायत की थी। जांच में मेस परिसर में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद प्रशासन ने भोजन सप्लाई करने वाली मेस को सील कर दिया है। खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भोजन का सही समय : सेहत से गहरा संबंध, भोजन से सुधर सकता है डायबिटीज नियंत्रण
रिसर्च में पाया गया है कि भोजन का समय शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर और हार्मोन संतुलन को प्रभावित करता है। शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार भोजन करने से मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है, जबकि अनियमित या देर रात भोजन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
मेमोरी : भूलना हमेशा भूलना नहीं होता, न्यूरॉन्स तय कर सकते हैं कौन-सी याद कब सामने आएगी
एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि दिमाग में मौजूद हिस्टामिन न्यूरॉन्स यादों तक पहुंच बनाने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। अध्ययन के दौरान चूहों पर किए गए प्रयोगों में देखा गया कि जब इन न्यूरॉन्स की गतिविधि अधिक थी, तब वे सीखी हुई जानकारी को आसानी से याद कर पाए, जबकि गतिविधि कम होने पर वही याद सामने लाना मुश्किल हो गया।
फैटी लिवर : शरीर में पोषक तत्वों की कमी और कई स्वास्थ्य समस्याओं की बन सकती है वजह
मोटापा और बदलती जीवनशैली के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह समस्या केवल लीवर को ही नहीं, बल्कि शरीर में विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
जल प्रदूषण की चुनौती : माइक्रोप्लास्टिक और फॉरएवर केमिकल्स से मानव स्वास्थ्य पर खतरा
माइक्रोप्लास्टिक, दवाओं के अवशेष और PFAS जैसे फॉरएवर केमिकल्स अब नदियों, भूजल और पेयजल स्रोतों में तेजी से पाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये प्रदूषक मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए दीर्घकालिक खतरा बनते जा रहे हैं।
इबोला का महासंकट : अमेरिका ने दुनिया को चेताया, ट्रंप प्रशासन ने बुलाई आपात बैठक, फीफा विश्व कप पर भी मंडराया खतरा!
अफ्रीका में फैल रहे इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को लेकर अमेरिका ने वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में बढ़ते मामलों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और Ursula von der Leyen के बीच आपातकालीन चर्चा हुई।
मलेरिया परजीवी : काबू पाने की दिशा में वैज्ञानिकों को मिली नई सफलता
मलेरिया अनुसंधान में नई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोफिजियोलॉजिकल सिस्टम और स्टेम सेल आधारित मॉडल्स की मदद से वैज्ञानिक अब मानव शरीर में प्लाज्मोडियम परजीवी के व्यवहार को अधिक सटीकता से समझ पा रहे हैं। इन तकनीकों से नई दवाओं और प्रभावी वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे दुनिया भर में मलेरिया के खिलाफ चल रही लड़ाई को नई ताकत मिल सकती है।
एमआरआई : पीठ और जोड़ों का दर्द कब बन जाता है गंभीर समस्या
पीठ और जोड़ों का दर्द आज आम समस्या बन चुका है, लेकिन यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे, शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने लगे, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो या चोट के बाद लगातार तकलीफ बनी रहे, तो डॉक्टर MRI जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। यह जांच दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने में मदद करती है और समय पर उपचार शुरू करने का अवसर देती है।
कैंसर पर सटीक प्रहार : FV अस्पताल में Da Vinci Xi रोबोटिक और ICG तकनीक का कमाल
चिकित्सा विज्ञान और रोबोटिक तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए FV अस्पताल के सर्जनों ने Da Vinci Xi रोबोटिक सिस्टम और ICG फ्लोरेसेंस इमेजिंग की मदद से 68 वर्षीय महिला के फेफड़ों से 11 मिमी का शुरुआती चरण (Stage 1A) का कैंसरयुक्त ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया।
करोड़ का कर्ज : जीवन रक्षक उपकरण ठप, सर्जरी में देरी, संकट के बीच वर्चुअल पोस्टमार्टम और CSR फंड से कायाकल्प की तैयारी
केरल का स्वास्थ्य विभाग गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार विभाग पर कुल 2,493 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें 476 करोड़ रुपये दवा कंपनियों और 2,017 करोड़ रुपये करुणा स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (KASP) के तहत देय हैं।
जीन थेरेपी : बदलेगी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज
वैज्ञानिकों ने निष्क्रिय वायरस की मदद से विशेष जीनों को रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाकर स्पास्टिसिटी के इलाज में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। प्रारंभिक शोध में यह तकनीक मांसपेशियों की कठोरता और ऐंठन को कम करने में प्रभावी दिखाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह जीन थेरेपी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और अन्य न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।