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राघव चड्ढा : एक लंबी पटकथा का अंतिम दृश्य ! मोड़ और बदलती सियासत की दिशा
भारतीय राजनीति में अचानक कुछ भी नहीं होता। जो घटनाएं एक झटके में घटती दिखती हैं, उनकी पटकथा अक्सर लंबे समय से लिखी जा रही होती है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना भी ऐसी ही एक घटना है, जिसे दलबदल कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा। यह एक क्रमिक दूरी, भीतर पनपते असंतोष और बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं का परिणाम है। इस घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी को झटका देने के साथ भारतीय जनता पार्टी के लिए भी एक नया विस्तार मार्ग खोल दिया है।
AAP में बड़ी टूट का दावा : राघव चड्ढा के इस्तीफे और BJP में जाने की अटकलों ने बढ़ाया सियासी पारा
दिल्ली की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब खबरें सामने आईं कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कथित तौर पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और कई अन्य सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राघव चड्ढा ने पार्टी पर आरोप लगाया कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और अब व्यक्तिगत हितों के लिए काम कर रही है। बताया गया कि उनके साथ स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह जैसे कई सांसद भी शामिल हो सकते हैं।
डीके शिवकुमार ने दिया बड़ा संकेत, कहा सिर्फ ताजी हवा के लिए नहीं आया दिल्ली
कर्नाटक की सियासत में हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। उन्होंने शीर्ष नेताओं से मुलाकात की पुष्टि तो की, लेकिन बातचीत का विवरण साझा करने से साफ इनकार कर दिया। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है, लेकिन वे इन बैठकों का विवरण सार्वजनिक नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, मैं अपना काम करता रहूंगा, लेकिन मैं यह नहीं बताऊंगा कि मैं किन-किन नेताओं से मिला हूं।
ननद भौजाई का स्वैग : ब्लैक ब्यूटी सारा और वेलवेट क्वीन सानिया तेंदुलकर की ग्लैमरस जोड़ी ने लूटी महफिल
GQ मोस्ट इनफ्लुएंशियल यंग इंडियन अवॉर्ड 2026 में सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा और बहू सानिया चंडोक ने अपने स्टाइल से सबका ध्यान खींच लिया। ब्लैक और वेलवेट लुक में दोनों ने ऐसा ग्लैमर बिखेरा कि हीरोइन्स भी फीकी नजर आईं। दोनों का लुक एक-दूसरे को परफेक्टली कॉम्प्लिमेंट करता दिखा—एक तरफ सारा का मिनिमल और स्ट्रॉन्ग स्टाइल, तो दूसरी तरफ सानिया का सॉफ्ट और रिच फैशन। यही वजह रही कि रेड कार्पेट पर दोनों की जोड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में रही।
दिव्य कुंड : जहां का पानी पीने से मोक्ष मिलने का दावा, जानिए कैसे और कब पहुंचें यहां
यात्रा भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, यहां स्थित दिव्य कुंडों का भी विशेष धार्मिक महत्व है। उदक कुंड और अमृत कुंड सहित पांच पवित्र जल स्रोतों के दर्शन और जल का स्पर्श जीवन के पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग माना जाता है। यह खबर आपको न सिर्फ इन कुंडों की महिमा बताएगी, बल्कि यात्रा के दौरान क्या करें इसका भी मार्गदर्शन देगी।
खुले कपाट : भक्तिभाव और उत्साह के बीच आस्था और श्रद्धा के साथ शुरू हुई चारधाम यात्रा
22 अप्रैल की सुबह केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत रूप से खोल दिए गए, जिससे चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई। इससे पहले भगवान केदारनाथ की डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विभिन्न पड़ावों से होकर गौरीकुंड पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। पूरे केदारपुरी क्षेत्र को फूलों से सजाया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया। भारी भीड़ के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर कुछ जगहों पर जाम और कठिनाइयों की स्थिति भी बनी, जिसके चलते प्रशासन ने यात्रियों से धैर्य रखने की अपील की है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था पूरे जोश में बनी रही।
IPL 2026 : 100 पर खत्म हुई कहानी, लेकिन असली सवाल अभी बाकी है… पढ़िए यहां, हार के बाद क्या कह गए शुभमन गिल
सवाल यह नहीं है कि टीम हारी क्यों, सवाल यह है कि टीम इस हार से सीखकर कैसे उठेगी। दरअसल हार जो चेतावनी और मौका भी है। हर बड़ी हार अपने साथ एक संदेश लेकर आती है कि या तो आप टूट जाते हैं, या फिर खुद को फिर से गढ़ते हैं। गुजरात टाइटंस के लिए यह पल निर्णायक है। अगर टीम ने इस हार को सिर्फ एक मैच समझकर नजरअंदाज किया, तो खतरा बढ़ेगा। लेकिन अगर इसे टर्निंग पॉइंट बना लिया, तो यही हार उनकी सबसे बड़ी ताकत भी बन सकती है।
सियासत में बड़ा बदलाव : सत्ता परिवर्तन के बीच नीतीश कुमार के प्रभाव और जेडीयू की आगे की रणनीति पर सवाल
बिहार की राजनीति में संभावित सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बीच राजनीतिक माहौल गर्म है। चर्चा है कि बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार बनने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की बात सामने आने से राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने और सक्रिय भूमिका को लेकर कई अटकलें लगाई गई थीं, लेकिन हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि वे बिहार की राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा है कि वे नई सरकार के कामकाज पर नजर रखेंगे और संगठन व राज्य के विकास में भूमिका निभाते रहेंगे। जेडीयू की बैठक में भी नेतृत्व को लेकर फैसला नीतीश कुमार पर छोड़ दिया गया, जिससे पार्टी में उनके प्रभाव और नेतृत्व की अहमियत बनी हुई दिखती है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में सत्ता बदलने के बावजूद नीतीश कुमार की भूमिका और भविष्य की रणनीति चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
फिल्मी दुनिया : कुछ यहां...कुछ वहां और बीच में पुरानी मोहब्बत की हलचल, प्रियंका की पोस्ट ने क्यों छेड़ दी बॉलीवुड की सबसे चर्चित कहानी
प्रियंका का कैप्शन “कुछ यहां...कुछ वहां” अपने आप में काफी खुला हुआ है। यह एक कैजुअल पोस्ट भी हो सकता है, लेकिन जिस तरह से एक खास फ्रेम ने चर्चा को हवा दी, उससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह महज इत्तेफाक था या एक सोच-समझकर किया गया नॉस्टैल्जिक ट्रिगर।
वीआईपी सिक्योरिटी में बड़ा फेरबदल : बिहार में डिप्टी सीएम और निशांत कुमार को ‘Z’ सुरक्षा, विजय सिन्हा की श्रेणी घटी
इधर, जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। उन्हें अब ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि ‘Z’ श्रेणी में प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की एक विशेष टीम तैनात रहती है, जो आधुनिक हथियारों और सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस होती है।
Women Reservation Bill : संसद में अटका महिला आरक्षण विधेयक, हेमा मालिनी और कंगना रनौत की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- महिलाओं के लिए यह बड़ा झटका
महिला आरक्षण विधेयक का पारित न हो पाना केवल एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं से जुड़ा सवाल है। Hema Malini और Kangana Ranaut जैसी हस्तियों की प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।
संसद में सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर सियासी तूफान, केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, DMK पर तीखी टिप्पणी
लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव जहां सरकार के अनुसार लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में कदम था, वहीं विपक्ष इसे क्षेत्रीय असंतुलन का खतरा मान रहा है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।