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सरेंडर नक्सली
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कांकेर में  8-8 लाख रुपए के  दो इनामी नक्सली हथियारों के साथ आत्मसमर्पण

कांकेर जिले में हिड़मे और शंकर नामक दो नक्सलियों ने पुलिस के सामने एके-47 सहित आत्मसमर्पण किया। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था। सुरक्षा बलों ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने और पुनर्वास नीति का लाभ लेने का आश्वासन दिया। यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद समाप्ति की सरकारी डेडलाइन पर हुआ और इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। अभी भी क्षेत्र में लगभग 15 नक्सली सक्रिय हैं।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 31 Mar 2026, 06:36 PM · अपडेट: 18 Sep 2026, 03:30 AM
कांकेर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

कांकेर जिले में सुरक्षा बलों को लिए बड़ी सफलता मिली है। हिड़मे और शंकर नामक दो नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। दोनों के पास एके-47 जैसे घातक हथियार थे और दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

एसपी निखिल राखेचा ने पुष्टि की कि आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें शासन की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिलाने की बात कही गई है। यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद समाप्ति की सरकारी डेडलाइन के दिन हुआ, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

हालांकि, कांकेर के जंगलों में अब भी लगभग 15 नक्सलियों की मौजूदगी बताई जा रही है। सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है और अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले समय में और भी नक्सलियों के सरेंडर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह कदम न केवल सुरक्षा बलों के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में भी सकारात्मक संदेश देता है।

कांकेर में दो नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया

हिड़मे और शंकर का आत्मसमर्पण

कांकेर जिले में दो नक्सली, हिड़मे और शंकर, ने एके-47 सहित पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। यह कदम नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई और नक्सलियों को सरकारी पुनर्वास योजना का लाभ देने का आश्वासन दिया गया। यह पहल नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने का हिस्सा है।

आत्मसमर्पण का समय और रणनीतिक महत्व

यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद समाप्ति की सरकारी डेडलाइन के दिन हुआ। सुरक्षा बलों के लिए यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता है और इससे क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश गया है।

वर्तमान स्थिति और आगे की योजना

कांकेर के जंगलों में अभी भी लगभग 15 नक्सली सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बल उनका पता लगाकर अभियान जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।

संदेश और भविष्य की दिशा

इस घटना से न केवल सुरक्षा बलों की सफलता को दर्शाया गया है बल्कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास की दिशा में भी सकारात्मक संकेत देती है। आने वाले समय में और अधिक नक्सलियों के आत्मसमर्पण की उम्मीद जताई जा रही है।

कांकेर जिले में दो नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली: हिड़मे और शंकर।

इनाम राशि: दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था।

हथियार: दोनों के पास एके-47 जैसे घातक हथियार थे।

प्रक्रिया: पुलिस ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया के तहत शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने का आश्वासन दिया।

महत्वपूर्ण समय: यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद समाप्ति की सरकारी डेडलाइन के दिन हुआ, जिसे सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

वर्तमान स्थिति: कांकेर के जंगलों में अब भी लगभग 15 नक्सली सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ सुरक्षा बल अभियान जारी है।

सरकारी प्रयास: नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, भविष्य में और आत्मसमर्पण की उम्मीद जताई गई है।

यह घटना सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक जीत है और सरकार की पुनर्वास नीति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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