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नौकरी लगाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार
नौकरी लगाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार
छत्तीसगढ़

डिजिटल जालसाजी : मंत्रालय के फर्जी नियुक्ति पत्र से 1.5 करोड़ की ठगी, गुरुजी ही निकले मास्टरमाइंड

रायपुर (राखी थाना क्षेत्र) में एक बड़े फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें दो लोगों ने छत्तीसगढ़ सरकार के नाम से फर्जी भर्ती आदेश बनाकर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर फैलाए। इन फर्जी दस्तावेजों में मंत्रालय और अधिकारियों के नकली डिजिटल साइन भी थे। नौकरी दिलाने के नाम पर उन्होंने करीब 34 बेरोजगार युवाओं से लगभग 1.5 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस जांच में मुख्य आरोपी एक शिक्षक और उसका साथी क्लर्क निकले, जिन्हें साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया है। कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
05 May 2026, 01:42 PM
रायपुर

कहते हैं कि जब इंसान की नियत डोलती है, तो वह सबसे पवित्र पेशे को भी कलंकित करने से पीछे नहीं हटता। रायपुर ग्रामीण के राखी थाना क्षेत्र में एक ऐसी ही सनसनीखेज साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की उगाही की गई। यह कोई मामूली धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि इसमें बाकायदा छत्तीसगढ़ मंत्रालय के नाम और आला अधिकारियों के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग कर 'भरोसे का जाल' बुना गया था।

साजिश की शुरुआत और पुलिसिया कार्रवाई

इस काली कहानी का खुलासा तब हुआ जब 24 अप्रैल 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी राजपाल बघेल ने थाना राखी में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर एक सरकारी नियुक्ति आदेश तेजी से वायरल हो रहा था। इस आदेश में दावा किया गया था कि विभिन्न सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर भर्तियां की जा रही हैं।

जैसे ही पुलिस को इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, रायपुर पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया। साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों ने जब व्हाट्सएप ट्रेल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया, तो कड़ियाँ डोंगरगढ़ से जुड़ती नजर आईं।

शिक्षक और क्लर्क की 'जुगलबंदी'

पुलिस की तफ्तीश में जो चेहरा सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड राजेश शर्मा उर्फ राजू (53 वर्ष) निकला, जो पेशे से एक शिक्षक है। वह डोंगरगढ़ के वार्ड नंबर 01 खुटापारा का निवासी है। पूछताछ में राजेश ने कबूला कि कर्ज के बोझ और आर्थिक तंगी के कारण उसने अपराध का रास्ता चुना।

इस साजिश में उसका साथ दिया मनोज कुमार श्रीवास्तव (52 वर्ष) ने, जो एक निजी स्कूल में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। इन दोनों ने मिलकर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से सामान्य प्रशासन विभाग का हूबहू दिखने वाला फर्जी आदेश तैयार किया। उन्होंने इसमें सचिव और उप-सचिव के फर्जी डिजिटल साइन तक लगा दिए ताकि कोई भी आसानी से धोखा खा जाए।

34 लोग बने शिकार, 1.5 करोड़ का वारा-न्यारा

इन शातिर ठगों ने अब तक करीब 34 बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया और उनसे नौकरी दिलाने के नाम पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये वसूल लिए। जांच में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब पता चला कि आरोपियों को शायद अपनी गिरफ्तारी की भनक लग गई थी। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने भिलाई की एक महिला से ठगे गए 1,90,000 रुपये वापस भी कर दिए थे, लेकिन कानून के हाथ उन तक पहुँच ही गए।

पुलिस की जब्ती: पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल कंप्यूटर सेट, सीपीयू, प्रिंटर और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन्ही उपकरणों के जरिए सरकारी तंत्र की साख से खिलवाड़ किया जा रहा था।

कानूनी शिकंजा और सबक

थाना राखी में अपराध क्रमांक 76/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

सावधान रहें: यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है। डिजिटल युग में यदि कोई सरकारी नौकरी का आदेश सीधे आपके व्हाट्सएप पर आता है और उसके बदले पैसों की मांग की जाती है, तो वह निश्चित रूप से एक जाल है। आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी भी दस्तावेज पर भरोसा न करें, क्योंकि आपकी एक लापरवाही ठगों का हौसला बढ़ा सकती है।

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