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फिर गांजा पकड़ा गया  :  ओडिशा  झारखंड ले जा रहे 912 किलो गांजा महासमुंद मे पकड़ा गया, अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना थाना पुलिस ने 17 अप्रैल 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा से झारखंड ले जाया जा रहा लगभग 912 किलो गांजा एक ट्रक से जब्त किया। यह गांजा 29 बोरियों में कच्चे केले के नीचे छिपाकर रखा गया था। जब्त मादक पदार्थ की कीमत करीब 4.66 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने आईशर प्रो ट्रक, फर्जी नंबर प्लेट, और दो मोबाइल फोन भी बरामद किए। मौके से ट्रक चालक अब्दुल नईम (42), निवासी झारखंड को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 Apr 2026, 05:14 PM · अपडेट: 19 Oct 2026, 04:11 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना बसना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक आईशर प्रो ट्रक से भारी मात्रा में गांजा बरामद करते हुए एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। जब्त किए गए गांजे का कुल वजन लगभग 912.760 किलोग्राम बताया जा रहा है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4 करोड़ 66 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। 

पुलिस के अनुसार 17 अप्रैल को दोपहर लगभग 12:10 बजे मुखबिर की सूचना मिली की ओडिशा के पदमपुर क्षेत्र की ओर से एक संदिग्ध ट्रक भारी मात्रा में गांजा लेकर बसना की ओर आ रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया गया और इलाके में नाकाबंदी कर दी गई।

इसके बाद पलसापाली बैरियर (पदमपुर रोड) पर पुलिस टीम ने रणनीतिक रूप से घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया। प्रारंभिक जांच में चालक घबरा गया, जिससे पुलिस को शक और गहरा हो गया।

ट्रक की तलाशी में बड़ा खुलासा

वाहन की बारीकी से तलाशी लेने पर पुलिस को ट्रक के पीछे डाले में कच्चे केले के बोरों के नीचे छिपाकर रखी गई 29 प्लास्टिक बोरियां मिलीं। जब इन बोरियों को खोला गया तो उनके अंदर भारी मात्रा में गांजा पाया गया। दिलचस्प बात यह रही कि तस्करों ने गांजे को अलग-अलग रंगों की प्लास्टिक बोरियों (काला, लाल, हरा, पीला और मटमैला) में पैक कर उसे केले के ढेर के नीचे छिपाया था ताकि जांच के दौरान किसी को शक न हो।

अन्य बरामद सामग्री

तलाशी के दौरान पुलिस ने वाहन से कई अहम सामान भी जब्त किए, जिनमें शामिल हैं:

  • एक पोको कंपनी का टच मोबाइल फोन
  • एक आईटेल कीपैड मोबाइल फोन
  • दो अलग-अलग नंबर प्लेट (फर्जी)
  • एक आईशर प्रो 2059 ट्रक

इन सामानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि तस्करी को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जा रहा था और इसमें फर्जी पहचान का उपयोग किया गया था।

आरोपी की पहचान और पूछताछ

गिरफ्तार आरोपी ने अपना नाम अब्दुल नईम (42 वर्ष), निवासी झारखंड बताया है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि यह खेप ओडिशा से झारखंड ले जाई जा रही थी और इसके लिए फर्जी नंबर प्लेटों का उपयोग किया गया था ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।

पुलिस को संदेह है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए अन्य राज्यों तक मादक पदार्थों की सप्लाई करता है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। मौके पर गवाहों की उपस्थिति में पूरी जब्ती प्रक्रिया, तौल और पंचनामा विधिवत तरीके से किया गया।

बरामद गांजा, ट्रक और अन्य सामग्री को पुलिस ने कब्जे में लेकर सुरक्षित रख दिया है। आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए अभियान तेज किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में सीमा क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर निगरानी और भी कड़ी की जाएगी ताकि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

आगे की जांच जारी

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि:

  • इस तस्करी गिरोह के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं
  • गांजे की सप्लाई का अंतिम डेस्टिनेशन क्या था
  • फर्जी नंबर प्लेट और वाहन की व्यवस्था कैसे की गई

जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

मुख्य बातें

  • सूचना के आधार पर 17 अप्रैल को ओडिशा से आ रहे ट्रक को पलसापाली बैरियर पर रोका गया।
  • ट्रक में केले के बोरों के नीचे 29 प्लास्टिक बोरियों में गांजा छिपाया गया था।
  • तस्करी को छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट और कई मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया था।
  • आरोपी ने स्वीकार किया कि गांजा ओडिशा से झारखंड ले जाया जा रहा था।
  • पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है।
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