12th BRICS Parliamentary Forum: नई दिल्ली में 26-27 को होगा 12वां BRICS संसदीय फोरम, वैश्विक मुद्दों पर बनेगी सहमति
12th BRICS Parliamentary Forum: भारत 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में रूस, चीन, ब्राजील, ईरान और UAE समेत सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वैश्विक शासन में सुधार और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उम्मीद है कि सम्मेलन का समापन साझा संयुक्त घोषणापत्र के साथ होगा।
12th BRICS Parliamentary Forum: राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर बड़े
वैश्विक कूटनीतिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। भारत आने वाले 26 और 27 अक्टूबर को 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम (BRICS Parliamentary Forum) की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में रूस, चीन, ब्राजील, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख सदस्य देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ भी इस बैठक में शिरकत करने भारत आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विश्वास जताया कि यह मंच भारत की संसदीय कूटनीति के सफर में एक नया और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
इन बड़े मुद्दों पर केंद्रित होगी चर्चा
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि इस मंच का मुख्य उद्देश्य साझा संवाद के जरिए विविध वैश्विक विषयों पर सर्वसम्मति कायम करना है।
इस बार फोरम में जिन प्रमुख विषयों पर गहरा मंथन होगा, उनमें शामिल हैं:
लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती: अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर संसदीय व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाना।
मानव-केंद्रित तकनीक और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों का विकास इंसानियत की भलाई को ध्यान में रखकर करना।
वैश्विक शासन में सुधार: दुनिया की वर्तमान व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना।
सतत विकास: ब्रिक्स देशों में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के संतुलित और टिकाऊ भविष्य की राह तैयार करना।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अहम बैठक
यह वैश्विक बैठक ऐसे नाजुक समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर है। हालांकि, यह क्षेत्रीय संघर्ष फोरम के आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं है, फिर भी माना जा रहा है कि सदस्य देश बैठकों के इतर (साइडलाइंस पर) इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। हाल ही में भारत की अध्यक्षता में हुए
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान और UAE के बीच जारी मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य देशों ने एक सुर में साझा घोषणापत्र जारी किया था। इसी अनुभव के आधार पर कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी क्षेत्रीय तनाव साझा बयान जारी करने की राह में रोड़ा नहीं बनेगा।
25 अक्टूबर को तय होगा ड्राफ्ट, साझा घोषणापत्र पर नज़र
सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले, 25 अक्टूबर को सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की एक विशेष बैठक रखी गई है। इस बैठक में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के 'संयुक्त बयान' (Joint Declaration) के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। ओम बिरला ने भारतीय संसदीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा से ही चर्चा, तर्क और निरंतर संवाद के जरिए सहमति बनाने की नीति पर चलता आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी मित्र देशों के सकारात्मक सहयोग से इस फोरम का अंत भी एक मजबूत और सर्वसम्मत संयुक्त घोषणापत्र के साथ होगा।