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कोटा में मलेरिया जांच शिविर के दौरान स्वास्थ्य टीम
कोटा में मलेरिया जांच शिविर के दौरान स्वास्थ्य टीम
बिलासपुर

बारिश के कारण कोटा क्षेत्र में 10 दिन में 25 लोग मलेरिया की चपेट में स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

कोटा क्षेत्र में मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 10 दिनों में 25 मरीज सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार गांवों में लगाए गए जांच शिविर में 356 लोगों की जांच के दौरान केंदा गांव के तीन नए मरीज मिले, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Aug 2026, 10:48 AM · अपडेट: 05 Nov 2026, 01:51 AM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 10 दिनों के भीतर ही क्षेत्र में मलेरिया के 25 मरीजों की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण मच्छरों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की जाएगी।

गांवों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया 

मलेरिया की रोकथाम और संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने छतौना, शिवतराई, औरापानी तथा केंदा गांव में विशेष जांच शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में कुल 356 ग्रामीणों की जांच की गई। जांच के दौरान बुखार, ठंड लगना और शरीर में दर्द जैसी शिकायत वाले लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। जांच रिपोर्ट में केंदा गांव के तीन ग्रामीण मलेरिया संक्रमित पाए गए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित गांवों में लगातार सर्वे और स्क्रीनिंग अभियान जारी रहेगा ताकि संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

केंद्रीय ग्रंथालय का निरीक्षण करते कलेक्टर एवं प्रशासनिक अधिकारी

अस्पताल में मरीजों का इलाज जारी

जांच में संक्रमित पाए गए तीनों मरीजों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इनमें से दो मरीजों को गनियारी जन स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जबकि एक मरीज को बेहतर उपचार के लिए सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में सभी मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं जिन ग्रामीणों में बुखार के लक्षण पाए गए हैं, उनके भी ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार आने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराएं।

72 गांव पहले से मलेरिया घोषित हैं 

कोटा विधानसभा क्षेत्र और आसपास के करीब 72 गांवों को पहले से ही मलेरिया संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। हर वर्ष बारिश के मौसम में इन इलाकों में मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। बावजूद इसके, कई ग्रामीणों का आरोप है कि समय पर डीडीटी का छिड़काव, मच्छरनाशक दवाओं का उपयोग और मच्छरदानियों का वितरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता। यही कारण है कि हर साल कई लोग इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं और कई मामलों में जान भी गंवानी पड़ती है।

इससे जुड़ी खबरों के लिए पढ़े... https://keertiman.com/hi/article/malaria-wreak-havoc-35-villagers-found-positive-health-department-alert

स्वास्थ्य विभाग ने किए बचाव के प्रयास

लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब सक्रिय नजर आ रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित गांवों का दौरा कर मैदानी कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य टीमों को घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच करने, बुखार के मरीजों की पहचान करने और जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीणों को साफ-सफाई बनाए रखने, घरों के आसपास पानी जमा न होने देने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा रात में मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य समय रहते संक्रमण की श्रृंखला को तोड़कर मलेरिया के फैलाव पर प्रभावी नियंत्रण करना है।

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