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अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की जांच
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की जांच
अंबिकापुर (सरगुजा)

प्रशासन अलर्ट : अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर निजी प्रैक्टिस का आरोप

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी अस्पतालों में सेवाएं देने का आरोप लगा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, CMHO ने निजी अस्पतालों से शपथ पत्र मांगा है और सरकारी डॉक्टरों की अवैध प्रैक्टिस पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने तक की चेतावनी दी है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
22 Jun 2026, 02:56 PM
अंबिकापुर

अंबिकापुर स्थित देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पदस्थ कुछ डॉक्टरों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी अस्पतालों में सेवाएं देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने इस संबंध में जारी पत्र में बताया है कि कुछ चिकित्सक अस्पताल के OPD और IPD में निर्धारित जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों की देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी छोड़कर वे निजी अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं, जिससे सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

निर्धारित ड्यूटी का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश

डीन ने इस मामले की जानकारी सरगुजा कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहले भी संबंधित डॉक्टरों को चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया। डॉ. मेश्राम ने स्पष्ट कहा है कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की पहली जिम्मेदारी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि कोई चिकित्सक सरकारी सेवा के दौरान निजी संस्थानों में कार्य करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इधर राज्य सरकार भी सरकारी चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जिले के सभी सरकारी डॉक्टरों को निर्धारित ड्यूटी का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता

हालांकि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद शहर के कई निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टरों की सेवाएं लिए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायतें मिली हैं कि कुछ डॉक्टर सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करते हैं और बाद में वहीं उनका उपचार करते हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जाएगा।

इस बीच सरगुजा जिले के CMHO ने निजी अस्पताल संचालकों से शपथ पत्र भी मांगा है। इसमें अस्पतालों को यह घोषित करना होगा कि उनके यहां कोई भी शासकीय चिकित्सक पूर्णकालिक, अंशकालिक या ऑन-कॉल आधार पर प्रैक्टिस नहीं कर रहा है। 

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

यह शर्त आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों पर लागू की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी निजी अस्पताल में सरकारी डॉक्टरों की अवैध प्रैक्टिस पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है। ऐसे अस्पतालों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मरीज भर्ती करने की अनुमति भी प्रभावित हो सकती है।
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