Africa Fuel Market: वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। कई देशों में ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने के बीच मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अफ्रीका और यूरोप के बाजारों में अपना निर्यात बढ़ा दिया है। कंपनी ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की सप्लाई का रुख नए बाजारों की ओर किया है। इसके चलते इन क्षेत्रों में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 50% बढ़ गई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने ईंधन निर्यात को पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के साथ भूमध्यसागरीय देशों और यूरोप के अन्य बाजारों तक पहुंचाया है। कंपनी की सितंबर तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया, केन्या और तंजानिया में प्रीमियम पेट्रोल की सप्लाई के नए अवसर तलाशे गए हैं।
O2C कारोबार से कंपनी को मिला बड़ा मुनाफा
सितंबर तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार ने कंपनी की कमाई में अहम भूमिका निभाई। इस सेगमेंट का EBITDA यानी ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले का परिचालन मुनाफा सालाना आधार पर 68% बढ़कर रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपए हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 15,008 करोड़ रुपए था।
सितंबर तिमाही में शुद्ध मुनाफा 34% बढ़ा
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 34% बढ़कर 29,550 करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 22,092 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया था। कंपनी का परिचालन से राजस्व भी 28.5% की बढ़त के साथ रिकॉर्ड 3.38 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।कच्चे तेल की खरीद के लिए बदले सप्लाई स्रोत
वैश्विक स्तर पर समुद्री परिवहन में आ रही बाधाओं को देखते हुए रिलायंस ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में भी बदलाव किया है। कंपनी ने अमेरिका, खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों से उपलब्धता और कीमतों के आधार पर कच्चा तेल खरीदा। इस रणनीति से सप्लाई में रुकावटों के बावजूद रिफाइनरियों में रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का प्रसंस्करण जारी रखा जा सका। हालांकि, कच्चे तेल की खरीद और परिवहन की लागत बढ़ने से कंपनी पर दबाव भी आया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ माल ढुलाई और बीमा खर्च में भी इजाफा हुआ।
भारत में LPG उत्पादन लगभग दोगुना किया
घरेलू बाजार में रसोई गैस की मांग को पूरा करने के लिए रिलायंस ने LPG का सामान्य उत्पादन लगभग दोगुना कर दिया। इसके लिए अल्काइलेट और पेट्रोल के कुछ अन्य घटकों के उत्पादन में कटौती की गई।
घरेलू बाजार में कीमतों का पूरा फायदा नहीं मिला
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेजी के बावजूद रिलायंस इसका पूरा असर घरेलू ग्राहकों पर नहीं डाल सकी। इसके अलावा विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी के कारण भी कंपनी के रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बना रहा। इस तरह सितंबर तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन निर्यात और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन का फायदा मिला, तो दूसरी ओर घरेलू बाजार की कीमतों और बढ़ती परिचालन लागत से जुड़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा।







