Akka Web Series Review: नेटफ्लिक्स की नई Crime-Thriller वेब सीरीज अक्का 30 अक्टूबर को रिलीज हो चुकी है। कीर्ति सुरेश, राधिका आप्टे और तन्वी आजमी जैसे अनुभवी कलाकारों से सजी इस सीरीज में सत्ता, बदले और मातृसत्ता की कहानी दिखाई गई है। धर्मराज शेट्टी के निर्देशन में बनी यह सीरीज एक अनोखी दुनिया रचने की कोशिश करती है, लेकिन क्या इसकी कहानी दर्शकों को बांधकर रख पाती है? आइए जानते हैं इसके रिव्यू में।
अक्का की कहानी क्या है?
अक्का की कहानी पेरनुरु नाम के एक काल्पनिक राज्य पर आधारित है, जहां सदियों से मातृसत्ता का शासन चला आ रहा है। यहां सत्ता पुरुषों के बजाय महिलाओं के हाथों में रहती है। राज्य की सबसे बड़ी शासक को 'अक्का' कहा जाता है और अगली उत्तराधिकारी भी बेटी ही बनती है। फिलहाल इस राज्य की कमान मुतक्का (तन्वी आजमी) के हाथों में है, जबकि उसकी बेटी भवानी (कीर्ति सुरेश) कारोबार और शासन की जिम्मेदारियां संभाल रही है। इसी बीच मुंबई के बड़े तस्कर शंकर अन्ना (महेश मांजरेकर) की करीबी रुद्रा (राधिका आप्टे) पेरनुरु पहुंचती है। शुरुआत में उसका मकसद तस्करी के माल को राज्य के तट पर उतारना बताया जाता है, लेकिन उसके इरादे कुछ और ही हैं। रुद्रा असल में पेरनुरु की सत्ता को खत्म करना और मुतक्का के शासन को बर्बाद करना चाहती है। इसके पीछे क्या वजह है और क्या भवानी अपनी विरासत बचा पाएगी, यही कहानी का मुख्य आधार है।
कैसी है अक्का की कहानी और निर्देशन?
धर्मराज शेट्टी ने पेरनुरु के रूप में एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश की है, जो सामान्य क्राइम-ड्रामा से अलग नजर आती है। यहां सत्ता की व्यवस्था, सामाजिक नियम और अलग-अलग समुदायों की अपनी पहचान है। राज्य को परप्लाडी, हेरकड़ा और मलेबार जैसे घरानों में बांटना कहानी को एक बड़े साम्राज्य जैसा स्वरूप देता है। अक्का के पद से जुड़े नियम भी दिलचस्प हैं। इस पद पर बैठने वाली महिला शादी नहीं कर सकती, लेकिन उसका मां होना जरूरी है। उत्तराधिकारी के रूप में बेटी का होना भी अनिवार्य है, चाहे उसे गोद ही क्यों न लिया गया हो। येरुमा और कथुआ जैसी जनजातियों को शामिल करके कहानी में सामाजिक और राजनीतिक परतें जोड़ने की कोशिश की गई है।
कलाकारों की एक्टिंग कैसी है?
अभिनय के मामले में कीर्ति सुरेश सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। पारंपरिक साड़ियों और आकर्षक गहनों में उनका लुक शानदार है। इसके साथ ही भवानी के किरदार में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी सीरीज को मजबूती देती है। राधिका आप्टे भी रुद्रा के किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ती हैं। उनके अभिनय में कई जगह प्रभाव नजर आता है, हालांकि किरदार को जिस भावनात्मक गहराई की जरूरत थी, वह पूरी तरह उभर नहीं पाती। कीर्ति और राधिका के बीच फिल्माए गए आमने-सामने के दृश्य खास तौर पर देखने लायक हैं। तन्वी आजमी अपने अनुभव के दम पर मुतक्का के किरदार को प्रभावी बनाती हैं। वहीं, युवा मुतक्का की भूमिका में मोनिका पंवार ने भी अच्छा काम किया है।कॉस्ट्यूम और सेट डिजाइन की तारीफ बनती है
सीरीज के तकनीकी पक्ष में कॉस्ट्यूम डिजाइन खास तौर पर ध्यान खींचता है। कलाकारों के पहनावे, गहनों और लुक के जरिए उनके पद और व्यक्तित्व को अलग पहचान देने की कोशिश की गई है। पेरनुरु की दुनिया को पर्दे पर उतारने में भव्य सेट और विजुअल प्रेजेंटेशन भी मदद करते हैं। लेकिन बेहतर लोकेशन, शानदार कॉस्ट्यूम और बड़े कैनवास पर तैयार की गई दुनिया तभी असर छोड़ती है, जब कहानी भी उतनी ही मजबूत हो। 'अक्का' इसी मोर्चे पर कमजोर पड़ जाती है।







