Birkoni land dispute: जिले के ग्राम बिरकोनी में बीते 2 अक्टूबर की शाम उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब एक विवादित ज़मीन पर घेराबंदी को लेकर पंचायत प्रतिनिधि और एक स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालक आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते जुबानी जंग हाथापाई और मारपीट में बदल गई, जिसमें दोनों ही पक्षों के लोग चोटिल हुए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए पंचायत प्रशासन ने मौके पर जेसीबी बुलवाकर लगाई जा रही फेंसिंग को पूरी तरह उखाड़ फेंका। फिलहाल मामला थाने पहुंच चुका है और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
सार्वजनिक ज़मीन पर कब्ज़े का विरोध करने पर मारपीट: पंचायत का आरोप
मामले में ताम्रध्वज निषाद और ग्राम सरपंच चंदन चंद्राकर का कहना है कि शाम के वक्त उन्हें सूचना मिली कि लोकेश मेडिकल स्टोर के संचालक लोकेश अग्रवाल मजदूरों को लगाकर सार्वजनिक भूमि पर लोहे के तार से घेराबंदी करवा रहे हैं। शुरुआत में स्थानीय ग्रामीण गोवर्धन चंद्राकर ने उन्हें काम रोकने को कहा, लेकिन काम जारी रहने पर सरपंच चंदन चंद्राकर, पूर्व सरपंच ताम्रध्वज निषाद और अन्य पंच मौके पर पहुंचे।
अतिक्रमण से किया मना तो की मारपीट
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि जब उन्होंने लोकेश अग्रवाल और उनकी माता ममता अग्रवाल को अतिक्रमण करने से मना किया, तो लोकेश गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर आमादा हो गया। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे ताम्रध्वज निषाद पर पीछे से हमला कर दिया गया। घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों (डोलकुमार साहू, गिरीश चंद्राकर, ओमप्रकाश आदि) ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। इस झड़प में ताम्रध्वज के सिर पर गंभीर चोट आई है, वहीं सरपंच चंदन के कोहनी और पैर में चोटें लगी हैं। स्थिति बिगड़ती देख पंचायत ने जेसीबी की मदद से अवैध फेंसिंग को तुरंत हटवा दिया।निजी ज़मीन पर हो रहा था काम, पंचायत ने की दबंगई: लोकेश अग्रवाल
दूसरी तरफ, लोकेश मेडिकल के संचालक लोकेश अग्रवाल ने पूरे मामले को अलग मोड़ देते हुए इसे अपनी निजी संपत्ति का विवाद बताया है। लोकेश का दावा है कि वे अपनी दुकान से लगी निजी ज़मीन पर ही तार घेरवाने का काम करवा रहे थे, तभी गोवर्धन चंद्राकर ने आकर बेवजह विवाद खड़ा किया और जनप्रतिनिधियों को बुला लिया। लोकेश का आरोप है कि जब उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से फेंसिंग रोकने का कोई लिखित आदेश या नोटिस मांगा, तो सरपंच चंदन चंद्राकर अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे और ताम्रध्वज निषाद ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उनका कहना है कि जब उनकी बुजुर्ग मां ममता अग्रवाल उन्हें बचाने आईं, तो उनके साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्रता की गई। लोकेश का कहना है कि मालिकाना हक के पूरे दस्तावेज़ होने के बावजूद पंचायत ने दबंगई दिखाते हुए जेसीबी से फेंसिंग तार नष्ट कर दिए। इस मारपीट में लोकेश के गले, कंधे और घुटने में गंभीर चोटें आई हैं।
दोनों पक्षों का मेडिकल परीक्षण, पुलिस जांच में जुटी
गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों पक्षों ने देर रात थाने पहुंचकर एक-दूसरे के खिलाफ लिखित तहरीर दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि घायलों का डॉक्टरी मुलाहजा (मेडिकल टेस्ट) कराया जा रहा है। मौके पर काम कर रहे मजदूरों और प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

