CG News: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी और बैगा समाज की धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक पहचान को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम महिडबरा में संस्कृति गौरव सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 10 गांवों के कुल 61 लोगों ने अपनी मूल धार्मिक आस्था और परंपराओं में लौटने का निर्णय लिया। आयोजकों के अनुसार, यह निर्णय सभी लोगों ने स्वेच्छा से लिया। कार्यक्रम में विधायक भावना बोहरा सहित आदिवासी, बैगा और सर्व समाज के प्रमुख मौजूद रहे।
आयोजकों और समाज के वरिष्ठजनों के मुताबिक, वनांचल क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों से मतांतरण और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को लेकर लगातार बैठकें और संवाद किए जा रहे थे। इस दौरान आदिवासी, बैगा और सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी पारंपरिक मान्यताओं से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की।
पारंपरिक आस्था और रीति-रिवाजों की दी गई जानकारी
बैठकों के दौरान ग्रामीणों को पूर्वजों से चली आ रही पूजा पद्धतियों, धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताया गया। आयोजकों का कहना है कि लगातार हुए संवाद और जागरूकता अभियान के बाद 10 गांवों के 61 लोगों ने अपनी मूल धार्मिक आस्था से दोबारा जुड़ने का फैसला किया।
इन गांवों के लोग हुए सम्मेलन में शामिल
महिडबरा में आयोजित इस सम्मेलन में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए। इनमें कुशियारी, कारीढाप (बदना), कौआनार (बदना), खैरापारा (कुशियारी), घोघराखुर्द, सजनखार, छिरहा, परेवाछापर और नवापारा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्र शामिल रहे।सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आदिवासी और बैगा समाज की अपनी विशिष्ट पूजा पद्धति, परंपराएं और जीवनशैली है। यह विरासत कई पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और महिलाओं से अपनी संस्कृति, संस्कारों और पारंपरिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने की अपील की।
वनांचल क्षेत्रों में मतांतरण के प्रयासों पर जताई चिंता
विधायक भावना बोहरा ने वनांचल क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से मतांतरण के प्रयास होने की बात कहते हुए इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज अब अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को लेकर जागरूक हो रहा है। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ हुआ स्वागत और अभिनंदन
सम्मेलन में समाज के पारंपरिक पुजारियों और प्रमुखों ने रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। मूल आस्था में लौटने वाले लोगों का जनप्रतिनिधियों और समाज के पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इस दौरान विधायक भावना बोहरा और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंच पर लोगों के पैर पखारकर उनका पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया।







