Friday, 30 Oct 2026 भारत
ब्रेकिंग
BJP MLA Death: भाजपा को बड़ा झटका, अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन Mahasamund News: 9 महीने में 50 करोड़ का गांजा जब्त, 501 तस्कर गिरफ्तार Pangolin Smuggling: वन्यजीव तस्करी का खुलासा, पैंगोलिन के शल्क के साथ 6 आरोपी गिरफ्तार Crime News: ओडिशा से मथुरा गांजा ले जा रहे पति-पत्नी गिरफ्तार, 4.25 लाख का माल जब्त Health Department Action: बिना लाइसेंस चल रहा था क्लिनिक, जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लगाया ताला Bagbahara Leopard Attack: तेंदुए की दहशत बरकरार, एक ही रात दो घरों में घुसकर किया शिकार BJP MLA Death: भाजपा को बड़ा झटका, अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन Mahasamund News: 9 महीने में 50 करोड़ का गांजा जब्त, 501 तस्कर गिरफ्तार Pangolin Smuggling: वन्यजीव तस्करी का खुलासा, पैंगोलिन के शल्क के साथ 6 आरोपी गिरफ्तार Crime News: ओडिशा से मथुरा गांजा ले जा रहे पति-पत्नी गिरफ्तार, 4.25 लाख का माल जब्त Health Department Action: बिना लाइसेंस चल रहा था क्लिनिक, जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लगाया ताला Bagbahara Leopard Attack: तेंदुए की दहशत बरकरार, एक ही रात दो घरों में घुसकर किया शिकार
W 𝕏 f
होम › रायपुर › CG Transport Department: 2 हजार से ज्यादा यात्री …
Inspection of non-functional GPS systems in buses (Image Source: AI Photo)
Inspection of non-functional GPS systems in buses (Image Source: AI Photo)
रायपुर Featured

CG Transport Department: 2 हजार से ज्यादा यात्री बसों के GPS बंद, निगरानी से बचने के लिए निकाला नया पैंतरा

CG Transport Department: छत्तीसगढ़ में यात्री बसों की निगरानी के लिए लगाए गए GPS सिस्टम में बड़ी लापरवाही सामने आई है। परिवहन विभाग की समीक्षा में पता चला कि 2000 से अधिक बसों में GPS डिवाइस लगे होने के बावजूद बंद हैं, जबकि करीब 300 बसों में अब तक GPS लगाया ही नहीं गया। विभाग ने ऐसे संचालकों पर परमिट रद्द करने की चेतावनी दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 12 Sep 2026, 12:25 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 01:05 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG Transport Department: सड़कों पर दौड़ रही यात्री बसों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए GPS लगाना अनिवार्य किया गया था, ताकि किसी भी वक्त उनकी लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सके। लेकिन छत्तीसगढ़ में बस संचालकों ने इस पूरी व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है। परिवहन विभाग की हालिया समीक्षा बैठक में जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, उसने विभाग की नींद उड़ा दी है। जांच में खुलासा हुआ कि राज्य भर में 2,000 से भी अधिक बसें ऐसी हैं, जिनमें GPS डिवाइस तो लगी हुई हैं, लेकिन उन्हें चालू ही नहीं रखा गया। 

3700 बसों में से 300 बसें में ही GPS सिस्टम 

डिवाइस बंद होने की वजह से निर्भया कमांड सेंटर के कंट्रोल रूम को इन बसों की कोई लाइव लोकेशन नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा, राज्य में दौड़ रही लगभग 3,700 यात्री बसों में से करीब 300 बसें तो ऐसी पाई गईं, जिनमें आज तक GPS लगाया ही नहीं गया। हैरानी की बात यह भी है कि सरकार और परिवहन विभाग के लगातार कड़े निर्देशों के बावजूद बस संचालक इस नियम को अनदेखा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, स्कूल बसों पर इस तरह की कड़ाई फिलहाल देखने को नहीं मिल रही है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। 

सिस्टम से बचने की कोशिश क्यों 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों में GPS नहीं लगा है या जिसे जानबूझकर बंद रखा जा रहा है, उनके परमिट निरस्त कर दिए जाएंगे। दोषी बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बस संचालक इस सिस्टम से बचने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? दरअसल, GPS चालू रहने पर बस की लाइव लोकेशन के साथ-साथ महीने भर का पूरा रिकॉर्ड निकल आता है। इससे यह साफ पता चल जाता है कि बस किस समय चली, कहां और कितनी देर रुकी, और क्या वह अपने तय रूट पर चल रही थी या नहीं।

विभाग को आशंका है कि GPS बंद रखने के पीछे कई तरह का घालमेल हो सकता है:

  • मनमर्जी की टाइमिंग: अधिक सवारियां जुटाने के चक्कर में तय समय से हटकर बसें चलाना।

  • रूट डायवर्जन: निर्धारित रास्ते के बजाय अपनी सुविधा के हिसाब से दूसरा रूट पकड़ लेना।

  • ओवरस्पीडिंग: जीपीएस से बस की रफ्तार पर भी नजर रखी जा सकती है, जिससे तेज रफ्तार चलाने की पोल खुल सकती है।

पैनिक बटन लगाना अनिवार्य 

यदि सिस्टम चालू रहे तो इन तमाम गड़बड़ियों का पूरा रिकॉर्ड बन जाता है और विभाग बाद में भी कार्रवाई कर सकता है। यही वजह है कि चेकिंग से बचने के लिए डिवाइस को बंद रखा जा रहा था। सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों में 'व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस' (VLTD) और 'पैनिक बटन' लगाना अनिवार्य किया है। मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके बावजूद कंट्रोल रूम तक लोकेशन न पहुंचना पूरी सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े करता है। 

समझाइश और कड़े तेवरों के बाद दिखा असर 

हाल ही में शुक्रवार को परिवहन विभाग ने बस संचालकों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें संचालकों को सख्त चेतावनी देने के साथ-साथ यह भी समझाया गया कि किसी भी सड़क हादसे या आपात स्थिति में GPS उनके खुद के लिए भी कितना मददगार साबित हो सकता है। इस समझाइश और कड़े तेवरों के बाद असर दिखने लगा है। बिना GPS वाली 300 बसों में से 125 बसों के संचालकों ने तुरंत डिवाइस लगाने के लिए आवेदन जमा कर दिए हैं। 
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें