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Raipur Police cyber fraud recovery workshop(Image Source: social media)
Raipur Police cyber fraud recovery workshop(Image Source: social media)
रायपुर

Raipur Police: साइबर ठगी पर पुलिस का बड़ा कदम, पीड़ितों को जल्द वापस मिलेगी फंसी हुई रकम

Raipur Police: रायपुर पुलिस रेंज में साइबर ठगी के पीड़ितों को रकम वापस दिलाने के लिए GRM/MRM पोर्टल पर कार्यशाला आयोजित की गई। चार वर्षों में 5.49 करोड़ रुपये होल्ड किए गए हैं। पुलिस और बैंक मिलकर रकम वापसी की प्रक्रिया तेज करेंगे।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 30 Oct 2026, 07:43 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Raipur Police: साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को उनकी रकम जल्द वापस दिलाने के लिए रायपुर पुलिस रेंज ने प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब ठगी की रकम होल्ड होने के बाद उसकी वापसी में होने वाली देरी और बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों के निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से 30 अक्टूबर को रायपुर स्थित पुलिस ट्रांजिट मेस में GRM/MRM (Grievance Redressal Mechanism/Money Restoration Module) पोर्टल पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश कुमार मिश्रा की मौजूदगी में हुई इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों के साथ साइबर नोडल अधिकारी और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की फंसी हुई रकम वापस दिलाने, बैंक खातों पर लगे होल्ड, लियन और फ्रीज को लेकर आने वाली शिकायतों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध समाधान करने पर चर्चा की गई।

 चार साल में 5.49 करोड़ रुपये कराए गए होल्ड

रायपुर पुलिस रेंज के पांच जिलों से सामने आए पिछले चार वर्षों के आंकड़े साइबर ठगी की गंभीरता को दर्शाते हैं। इस दौरान साइबर अपराध से जुड़े मामलों में कुल 5 करोड़ 49 लाख 12 हजार 932 रुपये की रकम होल्ड कराई गई। वहीं, 1 करोड़ 76 लाख 79 हजार 73 रुपये की वापसी के लिए न्यायालयीन आदेश प्राप्त होने का विवरण दर्ज किया गया है। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर में 29 लाख 62 हजार 802 रुपये, बलौदाबाजार में 15 लाख 51 हजार 878 रुपये, महासमुंद में 59 लाख 72 हजार 806 रुपये, धमतरी में 1 लाख 97 हजार 632 रुपये और गरियाबंद में 52 लाख 15 हजार 955 रुपये की राशि न्यायालयीन आदेश के तहत वापसी के लिए दर्ज की गई है।

पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय मजबूत करने की तैयारी

कार्यशाला में सहायक पुलिस महानिरीक्षक, तकनीकी सेवाएं, पुलिस मुख्यालय कवि गुप्ता ने GRM/MRM पोर्टल के इस्तेमाल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज होने से लेकर जरूरी दस्तावेजों के आदान-प्रदान और पीड़ित को रकम वापस दिलाने तक पोर्टल किस तरह मददगार साबित हो सकता है। आईजी अमरेश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्यायालय से रकम वापसी का आदेश मिलने के बाद भी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आदेश का पालन हो और संबंधित राशि वास्तव में पीड़ित के बैंक खाते तक पहुंचे। 

निर्दोष खाताधारकों को नहीं होनी चाहिए परेशानी 

साइबर ठगी की रकम का पता लगाने के दौरान कई बार बैंक खातों पर होल्ड, लियन या फ्रीज की कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी निर्दोष खाताधारक को बेवजह परेशानी का सामना न करना पड़े। अधिकारियों से कहा गया कि इस तरह की शिकायतों की जांच निष्पक्षता के साथ की जाए और उनका समय पर निराकरण हो। इसके अलावा पोर्टल के जरिए शिकायतों की डिजिटल निगरानी, जरूरी दस्तावेजों को समय पर साझा करने और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

पीड़ितों को रकम वापसी के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर 

आईजी अमरेश कुमार मिश्रा ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी केवल शिकायत दर्ज करने या एफआईआर तक सीमित नहीं है। पीड़ित को उसकी मेहनत की कमाई वापस दिलाने के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर शिकायत को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ लेते हुए तय समय में उसका निराकरण किया जाए। कोशिश होनी चाहिए कि रकम वापसी की प्रक्रिया में पीड़ितों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस कार्यशाला में रायपुर ग्रामीण, बलौदाबाजार, महासमुंद, गरियाबंद और धमतरी जिलों के पुलिस अधिकारी, साइबर नोडल अधिकारी और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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