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CGPSC Scam ED Chargesheet
CGPSC Scam ED Chargesheet
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CGPSC Scam: ED ने कोर्ट में दाखिल की 3700 पन्नों की चार्जशीट, पूर्व अध्यक्ष सोनवानी समेत 7 पर कसा शिकंजा

CGPSC Scam: 2020-21 परीक्षा कथित धांधली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 7 आरोपियों के खिलाफ करीब 3700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने 3.28 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की पहचान का दावा किया है। मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कई अधिकारियों, बिचौलियों और उद्योगपतियों के नाम शामिल हैं।

प्रकाशित: 23 Sep 2026, 12:04 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। जांच एजेंसी ने रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में 7 आरोपियों के खिलाफ करीब 3700 पन्नों का व्यापक आरोपपत्र (चार्जशीट) पेश किया है। इसमें अब तक 3.28 करोड़ की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की पहचान करने का दावा किया गया है। ED की जांच के अनुसार, ठगी और रिश्वत के इस खेल में अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से लगभग ₹3.13 करोड़ वसूले गए थे, जिनमें से ₹2.83 करोड़ नेटवर्क के पास रह गए। वहीं, ₹45 लाख की राशि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के जरिए घुमाई गई।

चार्जशीट में नामजद 7 आरोपी और उनकी भूमिकाएं

ED ने अलग-अलग भूमिकाओं के आधार पर CGPSC के पूर्व अधिकारियों, बिचौलियों और उद्योगपतियों को कटघरे में खड़ा किया है:

  • टामन सिंह सोनवानी (तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष): पद का दुरुपयोग कर पसंदीदा उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप। ग्रामीण विकास समिति के नाम पर CSR मद से ली गई ₹45 लाख की रिश्वत सीधे सोनवानी के प्रभाव से जुड़ी पाई गई है।

  • चेतन कुमार बोरघरिया (तत्कालीन OSD, मुख्यमंत्री कार्यालय): अपने पद और प्रभाव के दम पर अभ्यर्थियों में भरोसा पैदा करने का आरोप। उनके खातों में ₹71.15 लाख के संदिग्ध कैश डिपॉजिट की जांच की गई है। मुख्य साजिशकर्ता उत्कर्ष चंद्राकर के साथ उनकी डिजिटल बातचीत भी सामने आई है।

  • उत्कर्ष चंद्राकर (मुख्य समन्वयक): अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने और वित्तीय लेनदेन संभालने का मुख्य आरोपी। ED ने फरवरी 2025 के एक लिखित समझौते का उल्लेख किया है, जिसमें कुल ₹3.13 करोड़ के लेनदेन, ₹30 लाख की वापसी और ₹2.83 करोड़ बकाया रहने की बात है।

  • अनिल चंद्राकर: अभ्यर्थियों से रकम जुटाने और उसे आगे ठिकाने लगाने में शामिल। जांच में 'एग्रीमा फ्यूल्स' नाम की फर्म के जरिए पैसे के ट्रांसफर के सुराग मिले हैं।

  • श्रवण कुमार गोयल (निदेशक, श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लि.): ग्रामीण विकास समिति को फर्जी CSR फंड के जरिए ₹45 लाख भेजने का आरोप। बदले में CGPSC 2021 परीक्षा में उनके बेटे और बहू का चयन होने की बात उजागर हुई है।

  • ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन): CSR से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गोपनीय परीक्षा रिकॉर्ड संभालने का आरोप। रेड के दौरान इनके पास से CGPSC की संदिग्ध एंट्रियों वाली एक 'लाल डायरी' भी बरामद हुई है।

  • डॉ. विकास चंद्राकर (मध्यस्थ): अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र मुहैया कराने और पैसे वसूलने वाले सिंडिकेट में अहम कड़ी के रूप में काम किया।

    चयन की दर: 50 से 60 लाख रुपये प्रति सीट

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अलग-अलग प्रशासनिक पदों के लिए 50 से 60 लाख रुपये तक की दर तय कर रखी थी। रकम के बदले अभ्यर्थियों को चयन की पूरी गारंटी दी जाती थी।

मैरिज पैलेस से रिसॉर्ट तक का 'ट्रेनिंग' नेटवर्क:

  • पेपर लीक केंद्र: उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में बुलाकर लीक किए गए प्रश्नपत्र दिए गए।

  • विशेष तैयारी: इसके बाद उन्हें बारनवापारा क्षेत्र के एक गुप्त रिसॉर्ट में ले जाकर मुख्य परीक्षा के उत्तर रटाए गए।

करोड़ों का नकद लेनदेन और संपत्ति जब्ती 
ED ने बैंक खातों के विश्लेषण में कई चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। उत्कर्ष चंद्राकर के फेडरल बैंक खाते में ₹72.18 लाख का नकद क्रेडिट पाया गया है, वहीं चेतन बोरघरिया के खातों में जमा ₹71.15 लाख नकद का कोई संतोषजनक स्रोत नहीं मिला। इसके अलावा, ED ने कार्रवाई करते हुए पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की धमतरी, रायपुर और दुर्ग स्थित कृषि-आवासीय भूमि तथा उत्कर्ष चंद्राकर की संपत्तियों समेत कुल ₹47.54 लाख मूल्य की 6 संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच (जब्त) कर लिया है।
(नोट: ED के इन तमाम दावों और साक्ष्यों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई के दौरान होगी।)
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