Chhattisgarh Congress: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 92,700 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। कांग्रेस ने इसे मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके कार्यकाल के निर्णयों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी आंदोलन
जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस देशभर में 2 से 8 अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन करेगी। इस दौरान जिला स्तर पर प्रदर्शन, पदयात्राएं और कलेक्ट्रेट कार्यालयों के बाहर आंदोलन किए जाने की बात कही गई है।
महासमुंद में भी जिला स्तरीय मार्च निकालने की घोषणा की गई है। कांग्रेस के मुताबिक, मार्च के दौरान संविधान के अनुच्छेद 326 का सार्वजनिक वाचन किया जाएगा। इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
यादव ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 19 लाख मतदाताओं के नाम अनुपस्थित रहने और स्थान परिवर्तन के आधार पर हटाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह नाम हटाए जाने की प्रक्रिया चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस ने हटाए गए मतदाताओं के नामों का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हों।
बैलेट पेपर और VVPAT को लेकर भी मांग
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई मांगें रखीं। पार्टी ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने या VVPAT की 100 प्रतिशत पर्चियों का मिलान करने की मांग की। इसके साथ ही कांग्रेस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराई।
आंदोलन जारी रखने की बात
जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का वोट उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। कांग्रेस ने कहा है कि मताधिकार की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
नोट: इस खबर में 92,700 और करीब 19 लाख नाम हटाए जाने समेत अन्य आंकड़े कांग्रेस द्वारा प्रेसवार्ता में किए गए दावों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

