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Chhattisgarh traditional festival ( Image Source - AI Generated )
Chhattisgarh traditional festival ( Image Source - AI Generated )
रायपुर संभाग

Chhattisgarh Culture: गांवों में गूंजेगी पर्वों की रौनक, आस्था के रंग में रंगेगा आरंग

Chhattisgarh Culture: आरंग क्षेत्र के गांवों में पोला, कड़ू भात, तीजा और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख पर्वों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इन त्योहारों के जरिए ग्रामीण अंचल में लोकपरंपरा, आस्था, रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 09 Sep 2026, 04:05 PM · अपडेट: 21 Oct 2026, 10:20 AM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
मोहनदास मानिकपुरी -
Chhattisgarh Culture: सावन की विदाई के बाद अब आरंग क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में त्योहारों की तैयारियां तेज हो गई हैं। घरों में साफ-सफाई और सजावट का दौर शुरू हो चुका है, वहीं बाजारों में भी खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में पोला, कड़ू भात, तीजा और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख पर्वों के आयोजन से पूरा ग्रामीण अंचल उत्सव के रंग में रंग जाएगा। छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं से जुड़े ये पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में रिश्तों, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करते हैं। एक के बाद एक आने वाले इन त्योहारों को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

पोला में बैलों की होगी पूजा 

10 सितंबर को पोला पर्व मनाया जाएगा। इस दिन किसान अपने कृषि कार्यों में सहयोगी बैलों को स्नान कराकर सजाएंगे और विधि-विधान से पूजा करेंगे। किसान बैलों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे भी पोला पर्व को लेकर उत्साहित रहते हैं। मिट्टी और लकड़ी से बने नंदी-बैलों के साथ बच्चे पारंपरिक तरीके से इस पर्व का आनंद लेते हैं। यह पर्व खेती-किसानी और पशुधन के बीच पुराने और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है।

कड़ू भात में परंपरा और रिश्तों की मिठास 

पोला के बाद 12 सितंबर को कड़ू भात की परंपरा निभाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं इस दिन कड़ू भात खाकर व्रत की शुरुआत करेंगी। इस पर्व में करेले की सब्जी का विशेष महत्व माना जाता है। त्योहार के कारण बाजारों में करेले की मांग बढ़ गई है। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद परंपरा निभाने के लिए लोग इसकी खरीदारी कर रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में कड़ू भात केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आपसी मेल-जोल का अवसर भी है। महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर कड़ू भात ग्रहण करती हैं और पुरानी सहेलियों से मुलाकात करती हैं। कई बार यह मुलाकात पूरे साल बाद होती है। घरों के आंगन में बैठकर महिलाएं हंसी-मजाक के साथ अपने सुख-दुख साझा करती हैं। करेले की कड़वाहट के बीच रिश्तों की मिठास इस पर्व की खास पहचान बन जाती है।

तीजा में मायके की रौनक बढ़ेगी 

13 सितंबर को तीजा पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर विवाहित महिलाओं में विशेष उत्साह रहता है। मायके पहुंची बेटियों और बहनों के आने से घरों में खुशियों का माहौल बन जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। छत्तीसगढ़ी संस्कृति में तीजा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मायके और ससुराल के रिश्तों को जोड़ने वाला भावनात्मक त्योहार भी माना जाता है।

गणेश चतुर्थी से भक्ति का माहौल 

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ पर्वों की यह श्रृंखला भक्ति और उत्साह के रंग में बदल जाएगी। गांवों और कस्बों में गणपति स्थापना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। रंग-बिरंगी प्रतिमाएं अब घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापना के लिए तैयार हो रही हैं। गणपति बप्पा के स्वागत को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। पोला में पशुधन के प्रति सम्मान, कड़ू भात में रिश्तों की आत्मीयता, तीजा में महिलाओं की आस्था और गणेश चतुर्थी में भक्ति का संगम आरंग क्षेत्र के गांवों को लोकसंस्कृति और परंपराओं के रंगों से सराबोर करने जा रहा है। आने वाले दिनों में ग्रामीण अंचल में उत्सव और उमंग का माहौल देखने को मिलेगा।
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