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Water levels in dams rose due to August rainfall
Water levels in dams rose due to August rainfall
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Chhattisgarh Dam Water Storage: अगस्त की बारिश ने सुधारी तस्वीर, 88% से अधिक पहुंचा औसत जलस्तर

Chhattisgarh Dam Water Storage: अगस्त की झमाझम बारिश से छत्तीसगढ़ के बांधों और जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति काफी बेहतर हुई है। प्रदेश का औसत जल भंडारण 88 फीसदी से अधिक पहुंच गया है। खारंग, मनियारी और कोडार जैसे जलाशय 100 फीसदी भर चुके हैं, जबकि गंगरेल में भी जलस्तर 90 फीसदी के पार है। हालांकि केलो और अरपा भैंसाझार जैसे कुछ बड़े बांध अभी 50 फीसदी से नीचे हैं।

कीर्तिमान न्यूज
31 Aug 2026, 03:51 PM
रायपुर
Chhattisgarh Dam Water Storage: प्रदेशभर में अगस्त के महीने में हुई झमाझम बारिश ने जल संकट की सारी चिंताओं को फिलहाल दूर कर दिया है। लगातार बदले मौसम के मिजाज से छत्तीसगढ़ के छोटे-बड़े बांध और जलाशय अब लबालब नजर आ रहे हैं। राज्य के जल संसाधनों में बीते एक महीने के भीतर जबरदस्त सुधार देखा गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे प्रदेश के बांधों का औसत जल भंडारण 88 फीसदी से अधिक के आंकड़े को पार कर चुका है, जो 30 जुलाई तक महज 79 फीसदी के आसपास अटका हुआ था। 

नदी-नालों में लौट आई रौनक 

यानी सिर्फ अगस्त के 30 दिनों में ही कुल जल संग्रहण में करीब 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। लबालब भरे जलाशयों से अब सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जाने लगा है, जिससे नदी-नालों में भी रौनक लौट आई है। यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना की जाए, तो इस बार 30 अगस्त की स्थिति में बांधों का जलस्तर पिछले दो सालों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है। 
  • वर्ष 2024 (30 अगस्त): औसत जल भंडारण लगभग 85% था।

  • वर्ष 2025 (30 अगस्त): यह आंकड़ा घटकर 84% पर आ गया था।

  • वर्ष 2026 (मौजूदा स्थिति): इस बार जलस्तर बढ़कर 88% से अधिक दर्ज किया गया है।

  • कोड़ार बांध वर्षों बाद हुआ लबालब

    प्रदेश के सभी संभागों में मानसून का असर मिला-जुला लेकिन काफी हद तक संतोषजनक रहा है। बिलासपुर का खारंग जलाशय और मनियारी जलाशय अपने पूरे 100% जलभराव के स्तर पर पहुंच चुके हैं। महासमुंद का कोडार बांध भी लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार पूरी तरह से लबालब (100%) हो गया है। धमतरी जिले के प्रसिद्ध रविशंकर (गंगरेल) जलाशय में बीते एक माह में ही पानी का स्तर करीब 23 फीसदी बढ़ा है और यह 90% से अधिक भर चुका है, जहां से अब जल निकासी की जा रही है। अच्छी बारिश के बीच कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां जलाशयों की प्यास पूरी तरह नहीं बुझ सकी है। प्रदेश के दो प्रमुख बड़े बांध अब भी 50 फीसदी जलभराव के आंकड़े से पीछे हैं।
  • केलो बांध (रायगढ़): केवल 37.03% जलभराव।

  • अरपा भैंसाझार (बिलासपुर): मात्र 37.42% जलभराव।

    प्रमुख जलाशयों का तुलनात्मक आंकड़ा (31 जुलाई बनाम 30 अगस्त)
    जलाशय / बांध का नाम31 जुलाई की स्थिति30 अगस्त की स्थिति
    मिनीमाता बांगो83.35%90.78%
    गंगरेल जलाशय67.82%90.72%
    तांदुला जलाशय66.58%78.73%
    दुधावा93.59%82.37%
    सिकासार93.97%81.43%
    खारंग जलाशय100%100%
    सोंदूर68.77%84.56%
    मुरुमसिल्ली84.33%98.82%
    कोडार बांध87.90%100%
    मनियारी जलाशय100%100%
    केलो बांध40.45%37.03%
    अरपा भैंसाझार25.14%37.42%

  • शून्य से पहुंच 76 फीसदी

    बड़े बांधों के साथ-साथ प्रदेश के ज्यादातर छोटे और मध्यम जलाशयों में पानी का आवक तेजी से बढ़ा है। इनमें अधिकांश जलाशयों की भराव क्षमता 70 से 99 फीसदी तक पहुंच चुकी है। राजनांदगांव के मोंगरा बैराज ने तो एक मिसाल कायम की है। यहां 22 जुलाई तक जलभराव शून्य प्रतिशत के करीब पहुंच गया था, लेकिन महज एक हफ्ते की बारिश के दम पर इसका जलस्तर उछलकर 76 फीसदी तक पहुंच गया। 

    संचाई का मजबूत आधार भी तैयार 

    हालांकि, कांकेर जिले के मायना जलाशय और रायगढ़ जिले के किंकारीनाला में अब भी जलस्तर 50 फीसदी से कम बना हुआ है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगस्त की इस बारिश ने न सिर्फ निस्तारी और पीने के पानी की तत्कालीन जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि आने वाली रबी फसलों और आगामी वर्ष के लिए सिंचाई का मजबूत आधार भी तैयार कर दिया है।
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