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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा लीक
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा लीक
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साइबर अटैक : टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा डार्क वेब पर लीक

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक बड़े साइबर हमले का शिकार हुई है, जिसमें 2 लाख से अधिक फाइलें और करीब 630GB डेटा डार्क वेब पर लीक होने का दावा किया गया है। लीक डेटा में एपल और टेस्ला से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, डिजाइन फाइलें और कर्मचारियों की संवेदनशील जानकारी शामिल होने की बात सामने आई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 23 Jun 2026, 09:31 PM · अपडेट: 23 Oct 2026, 01:51 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक बड़े साइबर हमले का शिकार हुई है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी से जुड़ी दो लाख से अधिक गोपनीय फाइलें डार्क वेब पर लीक कर दी गई हैं। इन फाइलों में कंपनी के प्रमुख वैश्विक ग्राहकों एपल और टेस्ला से संबंधित तकनीकी दस्तावेज, डिजाइन फाइलें और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल बताई जा रही हैं। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके रोजमर्रा के कारोबार या उत्पादन गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है और सभी संचालन सामान्य रूप से जारी हैं।

जांच में जुटीं साइबर सुरक्षा टीमें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डेटा लीक की गंभीरता को देखते हुए एपल की ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी टीम भी मामले की जांच कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि डेटा तक पहुंच कैसे बनी और सुरक्षा में चूक कहां हुई। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना से एपल के संचालन या सप्लाई चेन पर तत्काल कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया है।

वर्ल्ड लीक्स समूह ने ली जिम्मेदारी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक एक रैनसमवेयर समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। दावा किया गया है कि कंपनी के सर्वर से लगभग 630 जीबी डेटा चोरी किया गया, जिसमें दो लाख से अधिक फाइलें और फोल्डर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यही समूह पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को निशाना बनाने का दावा कर चुका है।

एपल और टेस्ला से जुड़े दस्तावेज सामने आने का दावा

लीक हुए डेटा में एपल से संबंधित कई तकनीकी फोल्डर और दस्तावेज मिलने की बात कही जा रही है। इनमें उत्पादन प्रक्रियाओं, सामग्री मानकों और गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट में आईफोन के सर्किट बोर्ड से संबंधित निरीक्षण मानकों का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। वहीं टेस्ला से जुड़े दस्तावेजों में कंपनी के कुछ ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और असेंबली प्रक्रियाओं की जानकारी होने का दावा किया गया है। इनमें कुछ फाइलों पर "ट्रेड सीक्रेट" जैसी श्रेणियां भी दर्ज बताई गई हैं।

कर्मचारियों की निजी जानकारी भी लीक होने की आशंका

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, लीक हुए डेटा में केवल तकनीकी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि कई वर्षों के ईमेल रिकॉर्ड, सिस्टम लॉग और कर्मचारियों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में विदेशी कर्मचारियों के पासपोर्ट की प्रतियां और अन्य पहचान संबंधी जानकारी मौजूद होने का दावा किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा कई दिनों से डार्क वेब पर उपलब्ध हो सकता है।

फिरौती मांगने की भी चर्चा

मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि साइबर हमले के बाद कंपनी को कथित तौर पर फिरौती से जुड़े संदेश या संपर्क प्राप्त हुए थे। हालांकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने भी अभी तक इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

होसुर प्लांट से जुड़ी फाइलें भी शामिल

डेटा लीक में तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख आईफोन असेंबली प्लांट से संबंधित कुछ फाइलों और फोल्डरों के नाम भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी ने इस घटना की जानकारी अपने कुछ कर्मचारियों को पहले ही दे दी थी। गौरतलब है कि भारत में बनने वाले आईफोन के उत्पादन में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और कंपनी देश में एपल की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में उभर रही है।

सप्लाई चेन सुरक्षा पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारत में तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक चेतावनी भी है। वैश्विक कंपनियों के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में जब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, साइबर सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत महसूस की जा रही है।

डार्क वेब क्या है?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जो सामान्य सर्च इंजन पर दिखाई नहीं देता। यहां पहुंचने के लिए विशेष प्रकार के ब्राउजर और नेटवर्क की जरूरत होती है। अक्सर इसका उपयोग गोपनीय गतिविधियों, डेटा ट्रेडिंग और साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में चर्चा का विषय बनता है।

रैनसमवेयर हमला कैसे काम करता है?

रैनसमवेयर एक प्रकार का मालवेयर होता है जो किसी सिस्टम में घुसकर डेटा को लॉक कर देता है या उसे चुरा लेता है। इसके बाद हमलावर डेटा को सार्वजनिक करने या नष्ट करने की धमकी देकर फिरौती की मांग करते हैं। हाल के वर्षों में दुनिया भर की कई बड़ी कंपनियां ऐसे हमलों का सामना कर चुकी हैं।

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