Delhi Police Job Scam: टाटा मोटर्स समेत बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले फर्जी भर्ती रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने वजीराबाद के संगम विहार इलाके में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर संचालक समेत दो महिलाओं सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह करीब 500 बेरोजगारों से लगभग 20 लाख रुपए की ठगी कर चुका था। पुलिस के मुताबिक आरोपी नौकरी पोर्टल ऐप से नौकरी तलाशने वाले युवाओं का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद टेली कॉलर युवतियां बेरोजगारों से फोन पर संपर्क कर उन्हें टाटा मोटर्स और दूसरी कंपनियों में नौकरी दिलाने का भरोसा देती थीं।
फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़
नौकरी के नाम पर उम्मीदवारों से अलग-अलग चरणों में पैसे वसूले जाते थे। वजीराबाद में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर डीसीपी निहारिका भट्ट ने आज बताया कि दिल्ली पुलिस की एएटीएस को सूचना मिली थी कि वजीराबाद के संगम विहार स्थित एक फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। एडिशनल डीसीपी पुखराज कमल गुप्ता के निर्देश पर एएटीएस प्रभारी इंस्पेक्टर संजय कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर फ्लैट में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर संचालक सतीश मौर्या और टेली कॉलर के तौर पर काम कर रही युवतियों को पकड़ा गया। इसके बाद पुलिस ने दो अन्य टेली कॉलर युवतियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
नौकरी पोर्टल से डेटा लेकर ठगी
पुलिस ने मौके से 9 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ड और 2 बैंक पासबुक समेत अन्य सामान बरामद किया है। नौकरी पोर्टल से लेते थे बेरोजगारों का डेटा जांच में पता चला कि आरोपी नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं का डेटा नौकरी पोर्टल ऐप से हासिल करते थे।
इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां उम्मीदवारों को फोन करती थीं। उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर, वेब डिजाइनर, डेटा एनालिस्ट और अकाउंटेंट जैसे पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। उम्मीदवारों को पहले इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाता था।
पांच चरणों में बेरोजगारों से ठगी
इस तरह आरोपी एक ही व्यक्ति से कई चरणों में पैसे वसूलते थे। पांच चरणों में करते थे ठगी पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाने के बाद पांच अलग-अलग चरणों में पैसे मांगता था। शुरुआत में छोटी रकम लेने के बाद नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर लगातार नए शुल्क बताए जाते थे।
उम्मीदवारों को जब तक ठगी का अहसास होता, तब तक आरोपी उनसे हजारों रुपए वसूल चुके होते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है। खुद 500 रुपए की ठगी का हुआ था शिकार पुलिस के मुताबिक फर्जी कॉल सेंटर का संचालक 36 वर्षीय सतीश मौर्या एमएससी की पढ़ाई कर चुका है।
500 की ठगी से सीखा फर्जीवाड़े का तरीका
उसने एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स समेत कई संस्थानों में नौकरी की थी। इसी दौरान उसके साथ नौकरी दिलाने के नाम पर 500 रुपए की ठगी हुई थी। पुलिस पूछताछ में सतीश ने बताया कि इसी घटना के बाद उसे नौकरी के नाम पर ठगी करने का तरीका सूझा। शुरुआत में वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में साझेदारों के साथ कॉल सेंटर चलाता था, लेकिन पिछले करीब एक साल से वह अकेले ही यह काम कर रहा था।
करीब तीन महीने पहले उसने संगम विहार स्थित फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया था। उसने नौकरी पोर्टल ऐप के जरिए टेली कॉलर युवतियों से संपर्क किया और उन्हें इस काम में लगाया।
500 लोगों से 20 लाख की ठगी
इसके बाद इसी पोर्टल से नौकरी तलाशने वाले युवाओं का डेटा लेकर उन्हें फोन कराया जाता था। करीब 20 लाख रुपए की ठगी का खुलासा पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि सतीश और उसके गिरोह ने करीब 500 लोगों को अपना शिकार बनाया और लगभग 20 लाख रुपए की ठगी की। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और अब तक कितने बेरोजगारों को ठगा गया है।

