Thursday, 01 Oct 2026 भारत
ब्रेकिंग
W 𝕏 f
होम › राज्य सरकार › Drinking Water: जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए प…
Dhamtari drinking water quality monitoring (Image Source: CGDPR)
Dhamtari drinking water quality monitoring (Image Source: CGDPR)
राज्य सरकार Featured

Drinking Water: जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए पेयजल स्रोतों की सख्त निगरानी शुरू

Drinking Water: मानसून के बाद जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पेयजल स्रोतों की सफाई, क्लोरीनेशन और गुणवत्ता जांच का अभियान तेज किया गया है। 623 गांवों में 3,110 ‘जल बहिनियां’ पानी की जांच कर रही हैं, जबकि हर सप्ताह 120 घरों और 15 जल टंकियों के नमूनों का लैब टेस्ट कराया जा रहा है।

क
प्रकाशित: 01 Oct 2026, 06:46 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
​रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Drinking Water: मानसून के अंतिम दौर में भारी बारिश के बाद जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए धमतरी जिले में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। 'स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी और हर बूंद में भरोसा' के संकल्प के साथ जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता, क्लोरीनेशन और टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित कर रहे हैं। ​कलेक्टर के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के बाद जलभराव के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए व ई की रोकथाम करना है।

​ग्रामीण जल सुरक्षा का मजबूत ढांचा

धमतरी जिले में सुरक्षित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशाल और सुदृढ़ अधोसंरचना निरंतर कार्यरत है, जिले में पेयजल के लिए कुल 16,024 स्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें 9,981 हैंडपंप, 718 नल-जल योजनाएं और 2 वृहद समूह जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं, जो दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी पहुंचा रही हैं। पानी के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले भर में 548 जल टंकियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही, जलापूर्ति को पूरी तरह कीटाणुरहित और सुरक्षित बनाने के लिए 529 आधुनिक क्लोरिनेटर मशीनें स्थापित की गई हैं, जो नमक और पानी के घोल से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा सक्रिय क्लोरीन तैयार कर पानी को सूक्ष्मजीवों और हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त रखती हैं।

पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और जल गुणवत्ता की जांच करती महिला कर्मी।

​3,110 'जल बहिनियां' बनीं गांव-गांव की पहरेदार

पेयजल की गुणवत्ता जांच में जनभागीदारी का अनूठा मॉडल प्रस्तुत करते हुए जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) वितरित की गई है, प्रत्येक गांव से 5-5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रकार 3,110 प्रशिक्षित 'जल बहिनियां' प्राथमिक स्तर पर पानी की नियमित जांच कर रही हैं, यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो विभागीय अमला तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करता है।

​हर सप्ताह 120 घरों और 15 टंकियों के पानी का लैब टेस्ट

जांच व्यवस्था को केवल जलस्रोत तक सीमित न रखते हुए उपभोक्ता के घर तक विस्तारित किया गया है, जिले के चारों विकासखंडों—कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी से हर सप्ताह 30-30 यानी कुल 120 घरेलू जल नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जा रहा है। इसके अलावा हर हफ्ते 15 जल टंकियों की भी विशेष निगरानी की जा रही है। 

पानी में बदलाव दिखे तो तुरंत दें सूचना

​​जिला प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नागरिकों से पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। पानी के रंग, गंध या स्वाद में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखने पर तुरंत ग्राम पंचायत या PHE विभाग को सूचित करने का आग्रह किया गया है, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें