GMC doctors strike: इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति, अब मैदान में उतरे सीनियर रेजिडेंट्स
GMC doctors strike: इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। OPD सेवाएं ठप रहने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, मेडिकल टीचर्स और सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं। भोपाल कलेक्टर के साथ हुई बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकल सका। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि लिखित आश्वासन मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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कीर्तिमान न्यूज
09 Sep 2026, 08:32 AM
भोपाल
GMC doctors strike: स्टाइपेंड बढ़ाने की जिद पर अड़े गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के इंटर्न डॉक्टरों का हल्लाबोल अब विकराल रूप लेता जा रहा है। मंगलवार रात प्रशासन के साथ हुई दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद बुधवार को भी ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। दूर-दराज के इलाकों से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे लाचार मरीजों को बिना दिखाए ही वापस लौटना पड़ा। मामला अब सिर्फ इंटर्न तक सीमित नहीं रह गया है। GMC में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, मेडिकल टीचर्स और सीनियर रेजिडेंट्स भी इस हड़ताल के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।
बंद कमरे में काफी देर तक बैठक
आंदोलन को खत्म कराने के लिए देर रात भोपाल कलेक्टर खुद मोर्चा संभालने गांधी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां उन्होंने डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बंद कमरे में काफी देर तक बैठक की। हालांकि, स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर डॉक्टरों के कड़े रुख के कारण बात नहीं बन सकी। बैठक के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक संतुलन साधते हुए कहा, "छात्रों के प्रतिनिधियों से लगातार संवाद चल रहा है।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शनपर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों तक सन्नाटा
इस चर्चा को सकारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए और जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा।" एक तरफ डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं, तो दूसरी तरफ शासकीय हमीदिया अस्पताल और संबंधित विभागों में इलाज कराने आए आम नागरिकों की फजीहत हो रही है। ओपीडी पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों तक सन्नाटा पसरा है या फिर लंबी कतारें लगी हैं।
बिना इलाज के ही घर लौटे लोग
भीर मरीजों को छोड़ दें, तो सामान्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बिना इलाज के ही घर लौटना पड़ रहा है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने की उनकी न्यायसंगत मांग पर कोई लिखित या ठोस फैसला नहीं होता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।