विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से भव्य रैली का आयोजन किया गया। रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ निकली इस रैली ने शहर में आदिवासी परंपराओं की आकर्षक झलक पेश की। रैली के दौरान आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक स्वरूप के साथ शामिल हुए। इस दौरान समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संदेश दिया गया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जहां लोगों ने आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत और जीवनशैली को करीब से देखा।
संरक्षण का दिया संदेश
रैली के माध्यम से आमजनों को आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की जीवनशैली सदियों से प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार हैं। इनका संरक्षण करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। समाज ने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।
पौधरोपण की अपील
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया। वक्ताओं ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, जंगलों को सुरक्षित रखने और जलस्रोतों के संरक्षण की अपील की। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाना जरूरी है। आदिवासी समाज हमेशा से प्रकृति के संरक्षण की परंपरा को आगे बढ़ाता आया है और इसी सोच को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है।

विश्व आदिवासी दिवस
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा, माटी और देशप्रेम को याद करने का दिन भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा अपनी पहचान, रीति-रिवाज और प्राकृतिक जीवनशैली को बनाए रखा है। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और एकजुटता के माध्यम से समाज को और मजबूत बनाया जा सकता है।
युवाओं की भूमिका पर चर्चा
रैली के बाद संगोष्ठी एवं विचार-उद्बोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और युवाओं की जिम्मेदारियों को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से युवा समाज को नई दिशा दे सकते हैं।
संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकता और संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति प्रेम और अपनी माटी से जुड़े रहने में है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन बिलासपुर में सामाजिक एकजुटता, संस्कृति संरक्षण और पर्यावरण बचाने का संदेश देकर संपन्न हुआ।