Chhattisgarh Social Welfare Scam: छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग में दिव्यांगों के पुनर्वास और उनकी देखरेख के नाम पर हुआ बड़ा वित्तीय घोटाला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस पूरे मामले की अपनी तफ्तीश मुकम्मल कर ली है। शुरुआती तौर पर हालांकि करीब एक हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी, लेकिन विस्तृत पड़ताल के बाद फिलहाल साल 2004 से 2018 के बीच लगभग 40 करोड़ रुपये की अफरा-तफरी के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी अब इस मामले में शामिल कई आला अफसरों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की अंतिम तैयारी कर रही है।
30 से अधिक अफसरों-कर्मियों से पूछताछ, सचिव का भी बयान दर्ज
जांच के दौरान सीबीआई ने समाज कल्याण विभाग से जुड़े करीब 30 अधिकारियों और कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी का बयान भी दर्ज किया गया है। यह पूरा फर्जीवाड़ा समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित 'स्टेट रिसोर्स सेंटर' (SRC) और 'फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर' (PRRC) से जुड़ा हुआ है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन केंद्रों में कागजों पर फर्जी कर्मचारियों की नियुक्तियां दिखाई गईं और फिर उनके नाम पर सरकारी खजाने से वेतन और अन्य भत्तों की भारी-भरकम राशि आहरित कर ली गई। बीते वर्ष अक्टूबर महीने में सीबीआई ने रायपुर के माना स्थित इन दोनों परिसरों पर औचक छापेमारी कर ढेरों संदेहास्पद दस्तावेज जब्त किए थे।
कागजों पर चलते रहे सेंटर, ढाल बनी रही फर्जी नियुक्तियां
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 2004 से 2018 यानी 14 सालों की अवधि में इन संस्थाओं के नाम पर करीब 40 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए, जिनका कोई ठोस हिसाब-किताब नहीं मिला। आरोप है कि पीआरआरसी (PRRC) में जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक कामकाज या गतिविधियां नहीं हो रही थीं, लेकिन कागजी कर्मचारियों के नाम पर लगातार सरकारी पैसा निकाला जाता रहा। राज्य सरकार की शुरुआती जांच रिपोर्ट में भी इस बड़े पैमाने पर हुई गबन की पुष्टि की गई थी।हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
यह पूरा मामला रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर द्वारा दायर याचिका के बाद सुर्खियों में आया था। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के सख्त आदेश के बाद सीबीआई ने इस संबंध में विधिवत एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में आपराधिक षड्यंत्र, अमानत में खयानत, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पॉक्सो/पीसी एक्ट) की गंभीर धाराएं जोड़ी गई थीं। मामले की आंच शासन के कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। एफआईआर में संस्थाओं के गठन और संचालन से जुड़े तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों—जिनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, एम.के. राऊत, बी.एल. अग्रवाल और पी.पी. श्रोती शामिल हैं—की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। सीबीआई अब बयानों और जब्त दस्तावेजों के आधार पर प्रत्येक आरोपित अधिकारी की भूमिका तय कर रही है, जिसके बाद कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा।

