Bhilai Steel Plant: लोहे की चोरी का मामला अब CBI करेगी जांच, PMO तक पहुंची थी 3 हजार टन लोहे की हेराफेरी की शिकायत
Bhilai Steel Plant: करोड़ों रुपए के लोहा चोरी मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। 250 टन लोहा चोरी के साथ-साथ कथित बड़े सिंडिकेट की जांच भी की जाएगी। पुलिस की कार्रवाई में अब तक 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई आरोपी फरार हैं। जांच में फर्जी गेट पास, VTS से छेड़छाड़ और प्लांट के अंदरूनी नेटवर्क की भूमिका सामने आई है।
Bhilai Steel Plant: छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में हुए करोड़ों रुपए के लोहा चोरी कांड में एक बड़ा मोड़ आया है। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अब एजेंसी 250 टन लोहा चोरी के मामले के साथ-साथ उस व्यापक सिंडिकेट की भी परतें उधेड़ेगी, जिसकी शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंची थी।
PMO में पहुंची शिकायत: हर दिन साढ़े तीन लाख का खेल
PMO में दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि पिछले कुछ वर्षों के भीतर एक सोची-समझी साजिश के तहत भिलाई स्टील प्लांट से लगभग 3,000 टन लोहा पार कर दिया गया। आरोप के मुताबिक, प्लांट परिसर से रोजाना करीब 3.5 लाख रुपए कीमत का माल गायब किया जा रहा था। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने शिकायत BSP प्रबंधन को भेजी थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई।
पुलिस कार्रवाई में 21 गिरफ्तार, GM और नेता भी शिकंजे में
प्रशासनिक सुस्ती के बीच स्थानीय पुलिस ने अपने स्तर पर जांच आगे बढ़ाई और चोरी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में ट्रांसपोर्टर, पूर्व भाजपा नेता, BSP के जनरल मैनेजर (GM) और रायपुर इस्पात से जुड़े एमडी व मैनेजर समेत कुल 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस इस मामले में अदालत में चालान भी दाखिल कर चुकी है, हालांकि गिरोह के 6 सदस्य अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
फर्जी गेट पास और VTS से छेड़छाड़ का अनोखा तरीका
पुलिस की जांच रिपोर्ट में चोरी के इस खेल का पूरा तरीका उजागर हुआ है:
रूट कार्ड और गेट पास में हेराफेरी: प्लांट के एसएमएस-3 और मकड़ यार्ड से निकलने वाली गाड़ियों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया जाता था।
सिस्टम से खिलवाड़: गाड़ियों की ट्रैकिंग रोकने के लिए VTS (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) से छेड़छाड़ की जाती थी।
बिना वजन के निकासी: वाहनों को बिना सही वजन कराए या सिस्टम में गलत एंट्री दर्ज करके स्क्रैप और लोहे को गेट के बाहर निकाल दिया जाता था।
एके ट्रेडर्स के गोदाम में उतरती थी खेप
प्लांट से बाहर निकला चोरी का माल सीधे हथखोज-अकलोरडीह स्थित 'एके ट्रेडर्स' के गोदाम पहुंचता था, जो मोहम्मद सलीम के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस और साइबर सेल की टीम ने जब वहां दबिश दी, तो मौके से जेसीबी, हाइड्रा, चेन माउंटिंग जैसी भारी मशीनें और बड़ी मात्रा में लोहे की कटिंग प्लेट, बीम और फ्लू डस्ट बरामद हुई। इस पूरे मामले में पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत मामला दर्ज है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी संजय सिंह अपने बेटे अभय सिंह, क्रेन ऑपरेटरों, ट्रांसपोर्टरों और प्लांट के कुछ अंदरूनी कर्मचारियों के साथ मिलकर इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहा था।डिजिटल सबूतों और बैंक खातों से खुलीं परतें
जांच टीम ने आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और वॉट्सएप कॉलिंग के IPDR डेटा को खंगाला। संजय सिंह, भास्कर मुदलियार (पूर्व भाजपा नेता), जिवतेश वर्मा, चितानंद साहू, मीथेन मरकाम, निर्मल सिंह और क्रेन ऑपरेटर मदन साहू के बीच लगातार बातचीत के तकनीकी प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा, सुपरवाइजर घनश्याम गुप्ता के बैंक खाते में महज कुछ महीनों के भीतर 2.78 लाख रुपए से अधिक नकद जमा होने की जानकारी मिली है। पुलिस इस संदिग्ध रकम को भी इसी नेटवर्क की काली कमाई मान रही है। अब CBI के हाथ में कमान आने से उम्मीद जताई जा रही है कि भिलाई स्टील प्लांट के भीतर लंबे समय से फल-फूल रहे इस सिंडिकेट के कई बड़े चेहरों से नकाब उतरेगा।