INDIA Bloc Protest: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर भारी सियासी घमासान देखने को मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की तरफ मार्च निकाला। पूरे दिन चले इस जोरदार प्रदर्शन के बाद शाम ढलते-ढलते माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया, जब दिल्ली पुलिस ने धरना दे रहे नेताओं को जबरन हटाना शुरू कर दिया।
आकाशवाणी भवन बना विरोध का केंद्र
विपक्षी दलों का यह विरोध प्रदर्शन आकाशवाणी भवन परिसर के पास लगभग पांच घंटे से अधिक समय तक जारी रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पवन खेड़ा, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग समेत कई वरिष्ठ सांसद वहीं जमीन पर बैठकर नारेबाजी करते रहे। शाम होते ही स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने परिसर खाली कराने की कार्रवाई शुरू की और धरना दे रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों को हिरासत में लेकर पुलिस बस से रवाना कर दिया।
विपक्ष का 'सेव डेमोक्रेसी मार्च', 19 दल आए एक
साथ लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से विपक्षी गठबंधन ने इस आयोजन को ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ नाम दिया था। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें कुल 19 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि और सांसद एक साथ नजर आए।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC)
एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (उद्धव ठाकरे), राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
सीपीआई (एम), सीपीआई, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीडीपी
जेएमएम, सीपीआई (एमएल), आईयूएमएल, एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, एआईएफबी, केसी (एम) और केसी (जे) शामिल रहे।
कांग्रेस का तीखा हमला: "दमन से नहीं दबेगी आवाज"
पुलिस द्वारा नेताओं को हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि सरकार पुलिसिया दमन के जरिए विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, "मोदी-शाह की सरकार ने आकाशवाणी भवन में पुलिस भेजकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसदों को जबरन उठवाया है। लेकिन सरकार यह याद रखे कि दमनकारी नीतियों से जनता और विपक्ष की हुंकार अब दबने वाली नहीं है।" फिलहाल इस घटना के बाद राजधानी में सियासी पारा काफी बढ़ गया है और विपक्षी दल इस कार्रवाई के खिलाफ आगे की रणनीति तय करने में जुट गए हैं।

