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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख और अमेरिका से वार्ता की शर्तें
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख और अमेरिका से वार्ता की शर्तें
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ईरान का कड़ा रुख : अमेरिका के सामने रखीं 3 शर्तें, कहा-पुराने दिनों में नहीं लौटेगा समुद्री रास्ता

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने की बात दोहराते हुए अमेरिका से बातचीत के लिए तीन शर्तें रखी हैं। इनमें होर्मुज पर नियंत्रण की गारंटी, फ्रीज़ किए गए फंड की बहाली और उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा शामिल है। इस बीच ओमान की मध्यस्थता जारी है और दुनिया की नजर अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 27 Jul 2026, 08:14 AM · अपडेट: 29 Oct 2026, 07:19 AM
तेहरान
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

फारस की खाड़ी में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। 

तेहरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब यह समुद्री रास्ता अपनी युद्ध-पूर्व वाली पुरानी स्थिति में कभी वापस नहीं लौटेगा और न ही वह किसी नए या वैकल्पिक रूट के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीका ने पिछले दो हफ़्तों से जारी सैन्य हमले रोक दिए हैं और मामले को कूटनीतिक रास्ते पर लाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।

वार्ता के लिए तेहरान की तीन शर्तें

‘अल-अरबिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीका के साथ किसी भी बातचीत की मेज़ पर बैठने से पहले ईरान ने तीन प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं:

  1. होर्मुज पर एकाधिकार: बातचीत शुरू होने से पहले यह गारंटी दी जाए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का ही पूरा नियंत्रण रहेगा।

  2. ज़ब्त फ़ंड की बहाली: अमरीका द्वारा फ़्रीज़ किए गए ईरानी फ़ंड को तुरंत बहाल किया जाए।

  3. परमाणु कार्यक्रम: इन दो शर्तों के पूरा होने के बाद ही ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने को तैयार होगा।

ईरान ने मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के ज़रिए संदेश भेजा है कि वह इन शर्तों पर जिनेवा, दोहा या इस्लामाबाद में बातचीत करने के लिए तैयार है। ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना पूर्ण अधिकार होने का दावा किया है। संसद में दोहराया गया कि अब इस रणनीतिक मार्ग से किस जहाज़ की आवाजाही होगी, इसका फैसला सिर्फ तेहरान करेगा।
IRGC ने कड़े लहजे में कहा: 
"ईरान की अनुमति के बिना अब होर्मुज के ऊपर से एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता।"

ओमान और ईरान के बीच चर्चा 

गार्ड्स ने बताया कि चेतावनी का उल्लंघन करने पर हाल ही में क्षेत्र से गुजर रहे छह जहाजों को रोका गया था, जो इस बात का सीधा सबूत है कि इलाके के नेविगेशन सिस्टम पर पूरी तरह ईरान का ही कब्ज़ा है। दूसरी ओर, इस जलमार्ग को फिर से सुरक्षित खोलने के लिए ओमान और ईरान के बीच दो दिनों तक गहन चर्चा हुई है, जिसमें सकारात्मक प्रगति की खबर है। ओमान के वरिष्ठ अधिकारी शनिवार को तेहरान में द्विपक्षीय बातचीत पूरी कर वापस लौट गए हैं। हालाँकि, क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि किसी स्थायी समाधान तक पहुँचने के लिए अभी और बैठकों की ज़रूरत होगी। 

13 दिनों बाद सैन्य कार्रवाई रोकी

फिलहाल पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की इन शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। लगातार 13 दिनों तक चले हमलों के बाद अमरीका ने फिलहाल अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दी है, जिसके जवाब में ईरानी सेना ने भी पलटवार बंद करने की घोषणा की है। अमरीकी प्रशासन की ओर से माइक वाल्ट्ज़ ने पुष्टि की है कि डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक प्रयासों को एक मौका देने के इरादे से ही हमलों पर फिलहाल ब्रेक लगाया है।
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