Leopard Attack: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के झिटकी गांव में बीते दिनों एक ही परिवार के छह लोगों पर जानलेवा हमला करने वाले तेंदुए की आखिरकार मौत हो गई। 3 और 4 अक्टूबर की दरम्यानी रात सो रहे ग्रामीणों को अपना शिकार बनाने वाले इस तेंदुए के सिर और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। घटना के बाद रेस्क्यू कर इसे रायपुर स्थित जंगल सफारी ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वन विभाग की टीम ने चिकित्सकों की मौजूदगी में तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम कराकर नियमानुसार अंतिम संस्कार कर दिया है। हालांकि, उसकी मौत की असली वजह पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
शरीर पर मिले चोट के कई निशान
जंगल सफारी के डीएफओ तेजस शेखर ने बताया कि रेस्क्यू किए गए तेंदुए के शरीर पर चार से अधिक गंभीर चोटें थीं, जिनमें से सिर की चोट काफी गहरी थी। माना जा रहा है कि हमले के दौरान हुए बचाव या आपसी संघर्ष में उसे ये चोटें लगी होंगी। चोटों की वजह से उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उधर, महासमुंद वन मंडलाधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में वन कर्मचारियों की गश्त बढ़ा दी गई है और पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है।
दूसरा तेंदुआ दिखने से फिर बढ़ी दहशत
झिटकी गांव के लोग अभी तेंदुए के खौफ से उबर भी नहीं पाए थे कि बुधवार को पास ही के कर्रीपाठ जंगल में ग्रामीणों ने एक और तेंदुआ देखने का दावा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेंदुआ जंगल के भीतर की ओर भाग गया। इस ताजा घटनाक्रम के बाद से आसपास के गांवों में एक बार फिर किसी अनहोनी की आशंका को लेकर हड़कंप मच गया है।
वन विभाग पर लापरवाही का आरोप, अब तक नहीं लगे चेतावनी बोर्ड
भीषण हमले और गांव में दहशत के बावजूद वन विभाग के रवैये को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना को पांच दिन बीत जाने के बाद भी जंगल और खेतों की तरफ जाने वाले मुख्य रास्तों पर विभाग की ओर से कोई चेतावनी या सूचना बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। किसान और मजदूर रोजाना जान जोखिम में डालकर खेतों और जंगलों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित रास्तों पर तुरंत चेतावनी पोस्टर और सायरन/लाइट की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी अन्य ग्रामीण को अपनी जान न गंवानी पड़े। फिलहाल वन विभाग ने ग्रामीणों को समूह में बाहर निकलने और रात के समय एहतियात बरतने की सलाह दी है।

