Mahasamund Old Age Home: महासमुंद के वार्ड नंबर 10 इमलीभाठा में संचालित एक वृद्धाश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिस उम्र में बुजुर्गों को देखभाल, सम्मान और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में यहां रहने वाले बुजुर्गों ने कई परेशानियों का सामना करने का दावा किया है।
‘माता कौशल्या वेलफेयर फाउंडेशन’ से संबद्ध इस वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों ने भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और दैनिक जरूरतों को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखी हैं। हालांकि संस्था और विभाग की ओर से मामले को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
वृद्धाश्रम में रह रहे 5 बुजुर्ग, सुविधाओं को लेकर शिकायत
जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में इस वृद्धाश्रम में कुल 5 बुजुर्ग निवासरत हैं। इनमें एक महिला पैरालिसिस से पीड़ित बताई जा रही हैं। बुजुर्ग महिलाओं का आरोप है कि यहां रहने के दौरान उन्हें कई बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
उनका कहना है कि कपड़े धोने से लेकर रोजमर्रा के खर्चों तक की जिम्मेदारी उन्हें खुद उठानी पड़ती है। शारीरिक रूप से कमजोर बुजुर्गों को मजबूरी में दूसरों की मदद लेनी पड़ती है।
स्वास्थ्य सुविधा पर उठे सवाल
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि लंबे समय से किसी डॉक्टर ने यहां आकर स्वास्थ्य जांच नहीं की है। उम्रदराज और बीमार बुजुर्गों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।
भोजन की गुणवत्ता और समय को लेकर शिकायत
बुजुर्गों ने भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि दोपहर का खाना कई बार देर से परोसा जाता है और भोजन में पर्याप्त विविधता व पोषण नहीं मिलता। बुजुर्गों का कहना है कि कई आवश्यक सामानों के लिए भी उन्हें खुद खर्च करना पड़ता है। वहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपनी समस्याएं बताने में उन्हें दबाव महसूस होता है।
अधीक्षिका की उपस्थिति को लेकर विवाद
वृद्धाश्रम के संचालन को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि अधीक्षिका ने खुद को 7 दिनों से अनुपस्थित बताया था, लेकिन रजिस्टर जांचने पर 45 दिनों से उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। इस मामले को लेकर संस्था और जिम्मेदार विभाग के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग ने जानकारी से किया इनकार
वृद्धाश्रम मामले में जब समाज कल्याण विभाग से जानकारी ली गई तो विभाग की ओर से संस्था के संचालन संबंधी जानकारी नहीं होने की बात कही गई। वहीं, संस्था की मान्यता प्रक्रिया लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। दूसरी ओर, संस्था प्रबंधन का कहना है कि वृद्धाश्रम संचालन की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है और सहयोग के लिए पत्र भी भेजे गए हैं।
बुजुर्गों की जिम्मेदारी किसकी? उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की देखभाल और सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। प्रशासनिक व्यवस्था और संस्था के दावों के बीच अब जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी। फिलहाल बुजुर्गों की शिकायतों और वृद्धाश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
मामले की जांच और कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या स्थिति सामने आती है और बुजुर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

