Mahasamund Old Age Home: सेवा के दावे के बीच बुजुर्गों की शिकायत, वरिष्ठजन सेवा सदन की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
Mahasamund Old Age Home: महासमुंद के ईमलीभाठा स्थित वरिष्ठजन सेवा सदन में रहने वाले बुजुर्गों ने भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और देखभाल को लेकर अपनी परेशानियां बताई हैं। यह वृद्धाश्रम माता कौशल्या वेलफेयर फाउंडेशन से संबद्ध है और संस्था का सोसायटी पंजीयन है, लेकिन सरकारी अनुदान मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं समाज कल्याण विभाग ने संस्था के संचालन की जानकारी होने से इनकार किया है।
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कीर्तिमान डेस्क | लक्ष्मी साहू
16 Sep 2026, 07:35 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund Old Age Home: बुजुर्गों को सहारा और देखभाल देने के उद्देश्य से शुरू किए गए महासमुंद के वृद्धाश्रम वरिष्ठजन सेवा सदन में रहने वाले बुजुर्गों ने अब वहां की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी परेशानियां सामने रखी हैं। महासमुंद शहर के ईमलीभाठा क्षेत्र स्थित राठौर स्मृति भवन में संचालित माता कौशल्या वेलफेयर फाउंडेशन से संबद्ध इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और दैनिक जरूरतों को लेकर शिकायतें की हैं।
सोसायटी पंजीयन है, सरकारी अनुदान नहीं
वहीं वृद्धाश्रम की अधीक्षिका उषा साहू का कहना है कि उन्होंने वृद्धजन सेवा सदन के संचालन की जानकारी संबंधित विभाग को पत्र के माध्यम से दी है। उनका कहना है कि आश्रम में बुजुर्गों की देखभाल और भोजन व्यवस्था उनकी स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
दस्तावेजों के अनुसार माता कौशल्या वेलफेयर फाउंडेशन, महासमुंद का पंजीयन छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1973 के तहत किया गया है। संस्था का पंजीयन क्रमांक 122202591014 है और पंजीयन दिनांक 5 फरवरी 2025 दर्ज है।
हालांकि, समाज कल्याण विभाग का कहना है कि उसे इस वृद्धाश्रम के संचालन की जानकारी नहीं है। विभाग के अनुसार संस्था से संबंधित जानकारी उसके संज्ञान में नहीं है जानकारी के मुताबिक संस्था को किसी प्रकार का सरकारी अनुदान मिलने की जानकारी भी सामने नहीं आई है और वृद्धाश्रम का संचालन संस्था अपने स्तर पर किया जा रहा है।
ऐसे में सवाल यह है कि बिना सरकारी अनुदान के संचालित इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की सुविधाओं और निगरानी की जिम्मेदारी किस व्यवस्था के तहत तय है।
वर्तमान में वरिष्ठजन सेवा सदन में करीब 5 बुजुर्ग शांति दीवान, सूहजा प्रजापति, सुहमत बाई, नंदकुमारी और शांति बाई निवासरत हैं। इनमें एक महिला सूहजा प्रजापति पैरालिसिस से पीड़ित बताई गई हैं। आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग शांति दीवान ने बताया कि उन्हें अपने कपड़े खुद धोने पड़ते हैं। जो बुजुर्ग महिलाएं कपड़े धोने में सक्षम नहीं होतीं, उन्हें पैसे देकर कपड़े धुलवाने पड़ते हैं। उनका कहना है कि उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए उन्हें दैनिक कार्यों में सहयोग और नियमित देखभाल की जरूरत है।
वृद्धजन सेवा सदन में भोजन और स्वास्थ्य पर सवालभोजन व्यवस्था पर बुजुर्गों ने उठाए सवाल
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने भोजन व्यवस्था को लेकर भी अपनी शिकायतें रखी हैं। बुजुर्ग शांति दीवान का कहना है कि खाने में पर्याप्त मात्रा में दाल और सब्जी नहीं मिलती। कई बार भोजन में केवल भाजी परोसी जाती है। वहीं नंदकुमारी के अनुसार दोपहर का भोजन करीब 2 से 2:30 बजे के बीच दिया जाता है। और भोजन में स्वाद और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार वह पेट भरकर खाना नहीं खा पाते।
हालांकि आश्रम की अधीक्षिका उषा साहू का कहना है कि भोजन व्यवस्था बुजुर्गों की सेहत को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
स्वास्थ्य सुविधा पर भी सवाल
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि डॉक्टर को बुलाने की व्यवस्था नियमित नहीं है और करीब एक महीने से डॉक्टर जांच के लिए नहीं आए हैं। वृद्धाश्रम में रहने वाले लोगों की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए नियमित स्वास्थ्य जांच की जरूरत होती है।
अधीक्षिका की उपस्थिति को लेकर उठे सवाल
आश्रम की अधीक्षिका उषा साहू की उपस्थिति को लेकर भी शिकायत सामने आई है। बुजुर्गों का कहना है कि अधीक्षिका पिछले कुछ दिनों से आश्रम नहीं आ रही हैं। वहीं रजिस्टर की जांच में करीब 45 दिनों से उपस्थिति दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।
समाज कल्याण विभाग ने कहा- हमें जानकारी नहीं
मामले को लेकर जब समाज कल्याण विभाग से जानकारी ली गई तो विभाग ने वृद्धाश्रम के संचालन की जानकारी होने से इनकार किया। विभाग का कहना है कि संस्था उनके रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संस्था से जुड़ी कोई अप्रिय स्थिति बनती है तो इसकी जिम्मेदारी विभाग की नहीं होगी।
दस्तावेज और जमीनी स्थिति के बीच खड़े हुए सवाल
वरिष्ठजन सेवा सदन के पास संस्था पंजीयन और अधिकारियों को भेजे गए सूचना पत्र मौजूद हैं। संस्था अपने स्तर पर वृद्धजनों की सेवा करने का दावा कर रही है। वहीं आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी परेशानियां बता रहे हैं। दूसरी तरफ समाज कल्याण विभाग संस्था की जानकारी नहीं होने की बात कह रहा है।
ऐसे में अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जिले में निजी स्तर पर संचालित वृद्धाश्रमों की निगरानी व्यवस्था क्या है और वहां रहने वाले बुजुर्गों की सुविधाओं की नियमित समीक्षा किस स्तर पर की जाती है।