भिलाई टाउनशिप आवास नीति पर 500 से ज्यादा लोग सड़क पर उतरे, रिटेंशन खत्म होने की आशंका से बढ़ी चिंता
भिलाई टाउनशिप की आवास नीति में बदलाव की आशंका के विरोध में 500 से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया। रिटेंशन सुविधा खत्म होने की संभावना से हजारों परिवारों में चिंता बढ़ गई है।
कीर्तिमान डेस्क
09 Aug 2026, 06:01 PM
दुर्ग
भिलाई टाउनशिप में आवास नीति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सेल (SAIL) प्रबंधन की प्रस्तावित नीति में रिटेंशन सुविधा खत्म होने की आशंका के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ गई है। इस मुद्दे को लेकर शनिवार को ‘भिलाई को बचाना है’ अभियान के तहत 500 से अधिक लोग सड़क पर उतरे और बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों तक भिलाई स्टील प्लांट में सेवा देने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के आवास का भविष्य अब अनिश्चित नजर आ रहा है। उनका आरोप है कि लाइसेंस आवास, लीज रजिस्ट्रेशन और रिटेंशन स्कीम को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने से हजारों परिवारों में चिंता का माहौल है।
आवास नीति बदलाव से 10 हजार परिवारों की चिंता
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुसार, मोनेटाइजेशन नीति के तहत रिटेंशन व्यवस्था खत्म की जा सकती है। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद टाउनशिप में रहने वाले परिवारों को अचानक आवास छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों का दावा है कि रिटेंशन व्यवस्था के तहत उनसे लाखों रुपए की सुरक्षा राशि और किराए के आधार पर भुगतान लिया गया है। इसके बावजूद अब नई नीति में बदलाव की बात सामने आने से वे परेशान हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि टाउनशिप में रहने वाले 10 हजार से ज्यादा परिवार इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि भविष्य में टाउनशिप की जमीन को निजी संस्थाओं या बिल्डरों को सौंपा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने रिटेंशन नीति में बदलाव का विरोध किया
लोगों का कहना है कि भिलाई की पहचान केवल स्टील प्लांट से नहीं, बल्कि उसकी व्यवस्थित टाउनशिप और यहां वर्षों से बसे परिवारों से भी जुड़ी है। ऐसे में आवास नीति में बदलाव करते समय लोगों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। ‘भिलाई सत्याग्रह’ के बैनर तले युवा कांग्रेस और स्थानीय नागरिकों ने सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक से मार्च शुरू किया। करीब 500 से अधिक लोग नारेबाजी करते हुए बीएसपी मेन गेट की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने आवास खाली कराने के नोटिस, लाइसेंस मकानों, लीज रजिस्ट्रेशन और रिटेंशन नीति में बदलाव का विरोध किया। इसके अलावा बीएसपी के कथित निजीकरण को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
पुलिस ने शांतिपूर्ण आंदोलन करने की अपील की
प्रदर्शन को देखते हुए बीएसपी मेन गेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। करीब 200 पुलिसकर्मी और 150 सीआईएसएफ जवानों को तैनात किया गया था। मेन गेट तक पहुंचने वाले रास्ते पर तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने दूसरे बैरिकेड पर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ युवाओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की और कुछ पेड़ों पर भी चढ़ गए। करीब एक घंटे तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अपील की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
आवास मुद्दे पर विधायक का विरोध
प्रदर्शन में पहुंचे भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने बीएसपी प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि टाउनशिप को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों आवासों को खाली कराने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भिलाई की जनता के साथ मिलकर इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा। विधायक ने कहा कि, हम भिलाई का एक भी घर खाली नहीं होने देंगे। उन्होंने प्रभावित परिवारों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं जानने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात भी कही। फिलहाल भिलाई टाउनशिप की आवास नीति को लेकर कर्मचारियों, नागरिकों और बीएसपी प्रबंधन के बीच विवाद जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासन और प्रबंधन की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी।