छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को विशेष प्रशिक्षण देने वाले ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार का सोमवार रात निधन हो गया। कांकेर स्थित जंगल वारफेयर कॉलेज के पूर्व प्रमुख रहे ब्रिगेडियर पोनवार ने अपने कार्यकाल के दौरान हजारों जवानों को गुरिल्ला युद्ध और जंगल में ऑपरेशन चलाने की रणनीतियों की ट्रेनिंग दी थी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों की क्षमता बढ़ाने में उनका अहम योगदान माना जाता है।
आर्मी से सेवानिवृत्ति के बाद ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार ने 1 अप्रैल 2005 को कांकेर स्थित जंगल वारफेयर कॉलेज की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके निधन के बाद कॉलेज परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों, जवानों और अन्य लोगों ने उन्हें याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
चुनौतीपूर्ण हालात में संभाली थी जिम्मेदारी
जब ब्रिगेडियर पोनवार ने जंगल वारफेयर कॉलेज की कमान संभाली थी, उस समय बस्तर क्षेत्र नक्सली गतिविधियों से काफी प्रभावित था। राज्य सरकार ने नक्सल विरोधी अभियान को मजबूत करने के लिए अनुभवी सैन्य अधिकारी पोनवार को जवानों को गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी सौंपी थी। कांकेर पहुंचने के समय कॉलेज में प्रशिक्षण के लिए जरूरी संसाधनों और सुविधाओं की कमी थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी रणनीति, अनुशासन और मेहनत से महज तीन महीने में प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया। इसके बाद अगस्त 2005 में पहला प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया गया।
हजारों जवानों को बनाया नक्सल विरोधी अभियान के लिए तैयार
ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पुलिस सहित कई राज्यों के सुरक्षा बलों, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, आरपीएफ, एनएसजी और भारतीय सेना के जवानों को जंगल युद्ध कला और गुरिल्ला ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी गई। उनके प्रशिक्षण से जवानों में आत्मविश्वास बढ़ा और नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान चलाने की क्षमता को मजबूती मिली। करीब 37 हजार से अधिक जवानों को उन्होंने विशेष प्रशिक्षण दिया, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1971 के भारत-पाक युद्ध में भी निभाई थी भूमिका
ब्रिगेडियर पोनवार ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। सैन्य जीवन के बाद भी उन्होंने छत्तीसगढ़ में रहकर सुरक्षा बलों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार को सिर्फ एक प्रशिक्षक के तौर पर नहीं, बल्कि जवानों के मार्गदर्शक के रूप में भी याद किया जाएगा। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को नई दिशा देने और उनके हौसले को मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।