साझा इंजेक्शन बना संक्रमण का बड़ा कारण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संभाग के कई इलाकों में कुछ युवा नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब एक ही सुई या सिरिंज का उपयोग कई लोग करते हैं। इससे एचआईवी के अलावा अन्य रक्तजनित संक्रमण फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। विभाग लंबे समय से लोगों को 'एक मरीज-एक सुई' के नियम का पालन करने के लिए जागरूक कर रहा है, लेकिन नशे की लत के कारण कई लोग इस खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं।
सूरजपुर में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज मिले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, साझा इंजेक्शन के कारण एचआईवी संक्रमित पाए गए 175 पंजीकृत मरीजों में सबसे अधिक 108 मरीज सूरजपुर जिले के हैं। इसके अलावा कोरिया जिले में 40, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) में 15, सरगुजा में 11 और बलरामपुर जिले में एक मरीज की पहचान हुई है। विभाग का कहना है कि अभी भी कई ऐसे लोग हो सकते हैं, जो संक्रमित हैं लेकिन जांच के दायरे में नहीं आ पाए हैं। ऐसे लोगों की पहचान के लिए जागरूकता और जांच अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
नशीले इंजेक्शन की बिक्री पर पुलिस की नजर
नशीले इंजेक्शन के अवैध कारोबार को रोकने के लिए पुलिस भी लगातार कार्रवाई कर रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी कर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशीले इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। हालांकि, इसके बावजूद इनकी उपलब्धता पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
एचआईवी संक्रमित मरीज दवा से जी सकते हैं सामान्य जीवन
जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि एक ही इंजेक्शन का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल करने से एचआईवी संक्रमण तेजी से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति नियमित रूप से एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की दवाएं लेकर सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशे से दूर रहें और किसी भी स्थिति में इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज का दोबारा उपयोग न करें। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि नशीले इंजेक्शन के बढ़ते चलन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह आने वाले समय में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।