इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र लीक का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफे की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने नकली नोट और डायपर रखकर नारेबाजी की। संगठन ने मामले में ठोस कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना गंभीर लापरवाही का मामला है। इससे विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित हुए हैं। संगठन की मांग है कि केवल परीक्षा रद्द करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।
बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा रद्द
यह मामला बीएससी द्वितीय वर्ष के ‘Pest Management in Crops and Stored Grains-I (AENT 221)’ विषय से जुड़ा है। कवर्धा से प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित परीक्षा रद्द कर दी थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसकी नई तारीख अलग से जारी होगी।
28 कॉलेजों में भेजा गया था प्रश्नपत्र
कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक के अनुसार, संबंधित प्रश्नपत्र रायपुर में तैयार कर विश्वविद्यालय से जुड़े 28 कॉलेजों में भेजा गया था। शिकायत सामने आने के बाद प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर कॉलेजों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि पेपर किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में लीक हुआ।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि 72 घंटे में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।