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बलूचिस्तान मानवाधिकार रिपोर्ट
बलूचिस्तान मानवाधिकार रिपोर्ट
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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का कहर : जबरन अपहरण, टॉर्चर और गैर-कानूनी हत्याओं पर संयुक्त राष्ट्र पहुँची BVA की रिपोर्ट

बलूच वॉयस एसोसिएशन ने संयुक्त राष्ट्र को भेजी रिपोर्ट में बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन गायब करने और हिंसा के आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में राजनीतिक दमन और आर्थिक असमानता का भी मुद्दा उठाया गया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 06 Aug 2026, 12:44 PM · अपडेट: 23 Oct 2026, 05:39 PM
इस्लामाबाद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में आम नागरिकों और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की बर्बरता का मामला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंज उठा है। 'बलूच वॉयस एसोसिएशन' (BVA) ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंपी अपनी ताजा रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना के क्रूर दमन चक्र का पर्दाफाश करते हुए हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि बलूचिस्तान में नागरिकों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अगवा कर गायब कर देना, हिरासत में अमानवीय यातनाएं देना और फर्जी मुठभेड़ों या टॉर्चर के जरिए मार डालना एक आम ढर्रा बन चुका है। BVA के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल सैकड़ों बलूच नागरिकों को सुरक्षा एजेंसियां चुपचाप उठा लेती हैं। 

गुप्त यातना गृह में किया जा रहा प्रताड़ित 

निशाना बनाए जाने वालों में सबसे ज्यादा संख्या छात्रों, डॉक्टरों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही 885 से अधिक लोगों के जबरन अपहरण और 121 लोगों की गैर-कानूनी हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। अगवा किए गए लोगों को गुप्त यातना गृहों में रखकर इस कदर प्रताड़ित किया जाता है कि कई बार उनकी मौत हो जाती है। इसके बाद उनके शवों को या तो लावारिस फेंक दिया जाता है या फिर सामूहिक कब्रों में दफना दिया जाता है। बलूच वॉयस एसोसिएशन ने संयुक्त राष्ट्र का ध्यान बलूचिस्तान के आर्थिक शोषण की तरफ भी खींचा है। 

आबादी को नहीं मिला कोई फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल, प्राकृतिक गैस, तांबे और सोने जैसे बेशकीमती संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलूचिस्तान की जनता घोर गरीबी और पिछड़ेपन का सामना कर रही है। विशेष रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना पर हमला बोलते हुए BVA ने कहा कि इस अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट से स्थानीय बलूच आबादी को कोई फायदा नहीं मिला, बल्कि इसके नाम पर उनके संसाधनों की लूट और सैन्य घेराबंदी और बढ़ा दी गई है। प्रांत में उठने वाली हर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आवाज को पाकिस्तानी हुकूमत ताकत के बल पर दबा रही है। 

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बना रहे निशाना 

'बलूच यकजेहती कमेटी' की प्रमुख नेता महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि महरंग बलूच को जून में पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हुआ था। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अदालतों का दुरुपयोग राजनीतिक हथियार के रूप में कर रहा है। बलूचिस्तान में सच्चाई को दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकारों के लिए काम करना नामुमकिन जैसा हो गया है। 

शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न 

BVA ने दावा किया है कि राज्य प्रायोजित हिंसा, धमकियों और विवादित साइबर अपराध कानूनों का सहारा लेकर स्वतंत्र मीडिया की कमर तोड़ दी गई है। जो पत्रकार रिपोर्टिंग की हिम्मत दिखाते हैं, उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लेकर उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय खुफिया और मानवाधिकार विश्लेषकों का मानना है कि UN को भेजी गई यह रिपोर्ट पाकिस्तान सरकार की प्रशासनिक व नैतिक नाकामी का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

इलाके को सौन्य छावनी में किया तब्दील

शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिरोध को बातचीत से सुलझाने के बजाय पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे इलाके को सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया है। असहमति की हर आवाज पर 'आतंकवाद' का ठप्पा लगाकर अदालतों के जरिए सजा दिलाना, पाकिस्तान की पूरी न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
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