भारत की 'प्रलय' बनाम पाकिस्तान की 'फाज-JF-17'
हाल ही में पाकिस्तान की ओर से अपनी 'फाज' मिसाइल को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं। आइए जानते हैं कि भारत की 'प्रलय' और पाकिस्तान की इस मिसाइल में क्या बुनियादी अंतर हैं:
मार करने का तरीका: पाकिस्तान की 'फाज' एक हवा से हवा में मार करने वाली (Air-to-Air) मिसाइल है, जबकि भारत की 'प्रलय' एक शक्तिशाली सतह-से-सतह (Surface-to-Surface) मार करने वाली क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइल है।
रेंज (दूरी): पाकिस्तान का दावा है कि उसकी 'फाज' मिसाइल अधिकतम 180 किलोमीटर तक मार कर सकती है। वहीं, भारत की 'प्रलय' की मारक क्षमता 150 से लेकर 500 किलोमीटर तक है।
गति और टेक्नोलॉजी: पाकिस्तानी 'फाज' की अधिकतम गति लगभग Mach 3.5 होने का दावा किया गया है। इसके विपरीत, भारत की 'प्रलय' सुपरसोनिक गति से उड़ान भरती है और टर्मिनल फेज (लक्ष्य के करीब पहुँचने पर) में इसकी रफ्तार Mach 6.1 तक पहुँच जाती है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस के लिए इसे रोकना असंभव हो जाता है।
लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म: 'फाज' मिसाइल को पाकिस्तान के JF-17 Thunder लड़ाकू विमान से टेस्ट फायर किए जाने की बात कही जा रही है, जो अभी शुरुआती चरण में है और इसके ऑपरेशनल होने में अभी कई साल लग सकते हैं। वहीं, भारत की 'प्रलय' को पूरी तरह से मोबाइल लॉन्चर (8x8 प्रहार लॉन्चर) के जरिए जमीन से दागा जाता है, जो मोर्चे पर त्वरित तैनाती के लिए जानी जाती है।
स्पेसिफिकेशंस की तुलना एक नजर में
| विशेषता | फाज मिसाइल (पाकिस्तान) | प्रलय मिसाइल (भारत) |
| प्रकार | हवा से हवा में मार करने वाली | सतह से सतह पर मार करने वाली (क्वाजी-बैलिस्टिक) |
| रेंज | अधिकतम 180 किलोमीटर (दावा) | 150 से 500 किलोमीटर |
| स्वदेशीता | प्रारंभिक चरण / विदेशी तकनीक | पूरी तरह स्वदेशी (DRDO निर्मित) |
| गति | लगभग Mach 3.5 (दावा) | टर्मिनल फेज में Mach 6.1 तक |
| लॉन्च सिस्टम | JF-17 Thunder लड़ाकू विमान | मोबाइल लॉन्चर (8x8 प्रहार) |
सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल से कितनी अलग है 'क्वाजी-बैलिस्टिक' मिसाइल?
'प्रलय' की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'क्वाजी-बैलिस्टिक' प्रकृति है।
सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक तयशुदा और घुमावदार (Parabolic) रास्ते पर चलती हैं, जिसे रडार आसानी से ट्रैक कर लेता है।
इसके विपरीत, क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइलें उड़ान के दौरान अपने रास्ते और दिशा में बदलाव करने में सक्षम होती हैं। इसी काबिलियत के कारण दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियां इन्हें बीच हवा में बेअसर करने में नाकाम साबित होती हैं।







