Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR और RSS प्रमुख मोहन भागवत के विदेश में दिए बयान को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर निशाना साधा है। सिंघार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी पर FIR को लेकर सवाल
उमंग सिंघार ने राहुल गांधी के खिलाफ हुई FIR पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भाजपा एक तरफ समानता और लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। सिंघार के मुताबिक, सरकार ऐसे मुद्दों को बढ़ावा दे रही है, जिससे देश में विवाद और राजनीतिक तनाव बना रहे।
‘कांग्रेस कार्यकर्ताओं की शिकायत नहीं सुनी जाती’
सिंघार ने आरोप लगाया कि आम कांग्रेस कार्यकर्ता जब किसी मामले में FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास जाता है, तो उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। वहीं, राहुल गांधी के मामले में तेजी से FIR दर्ज किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई है और सरकार तानाशाही की ओर बढ़ रही है।मोहन भागवत के बयान पर भी साधा निशाना
RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान को लेकर भी उमंग सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश में ‘भारत सबका है’ जैसी बातें कही जा रही हैं, जबकि देश के भीतर राजनीतिक और सामाजिक माहौल को लेकर अलग तस्वीर दिखाई देती है।
सिंघार ने दावा किया कि भाजपा को युवाओं के आंदोलनों और बदलते राजनीतिक माहौल की चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में धार्मिक मुद्दों को लेकर लगातार विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
‘विदेश में कुछ, देश में कुछ और’
उमंग सिंघार ने कहा कि विदेशों में भारत की एकता और भाईचारे की बात करना अच्छी बात है, लेकिन यही संदेश देश के भीतर भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम विवादों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अगर भारत सभी का है, तो देश में बार-बार सांप्रदायिक तनाव की स्थिति क्यों बनती है। सिंघार ने मोहन भागवत से सवाल किया कि विदेश में कही गई बातों को क्या वे भारत के किसी सार्वजनिक मंच से भी दोहराएंगे?कांग्रेस नेता ने कहा कि देश और विदेश में दिए जाने वाले संदेशों में समानता होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा और RSS की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार और संगठनों के कथन के साथ उनकी जमीन पर होने वाली कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

