आपके नाम से 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है...’
फर्जी सीबीआई अफसर और वीडियो कॉल की निगरानी
इसके बाद शुरू हुआ खौफ का वो दौर, जिसने बुजुर्ग व्यापारी की रातों की नींद उड़ा दी।
बलराज सिंह (खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाला): उसने फोन और वॉट्सऐप के जरिए देवसिंह पर दबाव बनाया और परिवार के बारे में और जानकारी जुटाई।
प्रदीप सिंह (खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाला): उसे वीडियो कॉल पर सामने लाया गया। वर्दी और रौब दिखाकर उसने देवसिंह को सीधे जेल भेजने और पूरे परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी दी।
ठगों ने बुजुर्ग को इस कदर खौफजदा कर दिया कि उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' में रखते हुए हर घंटे वीडियो कॉल पर हाजिर रहने की हिदायत दी गई। 18 अगस्त से 3 सितंबर तक ठग रोजाना वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर नजर रखते रहे और मानसिक रूप से तोड़ते रहे।
4 सितंबर से शुरू हुआ वसूली का सिलसिला
जब बुजुर्ग व्यापारी पूरी तरह डर के साए में आ गए, तो 4 सितंबर से ठगों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देवसिंह ने ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजना शुरू कर दिया। कभी 1 लाख रुपये तो कभी 50 हजार रुपये की किस्तों में— 4 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर के बीच पीड़ित ने कुल 8 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसों का इंतजाम करने के लिए बुजुर्ग ने न सिर्फ अपने बैंक खाते में जमा पूंजी खाली कर दी, बल्कि घर में रखे सोने के गहने तक बेच डाले।डर इतना कि बच्चों से भी छिपाया सच
ठगों का खौफ इस कदर था कि देवसिंह ने इस खौफनाक वाकये की भनक अपने बेटे और बेटी तक को नहीं लगने दी। लेकिन 1 अक्टूबर तक अपनी पूरी जमा पूंजी गंवाने के बाद भी जब ठगों का लालच खत्म नहीं हुआ और वे और पैसों की मांग करने लगे, तब 3 अक्टूबर को देवसिंह ने हिम्मत जुटाकर अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी बात बताई। छोटे भाई ने जब पूरा घटनाक्रम सुना, तो तुरंत भांप गए कि देवसिंह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने बड़े भाई को समझाया और ढांढस बंधाया।
जांच में जुटी खमतराई पुलिस
भाई की सलाह पर देवसिंह ने तुरंत बैंक स्टेटमेंट, वॉट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और ट्रांजेक्शन रसीदें जमा कीं और 4 अक्टूबर को खमतराई थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। खमतराई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी (FIR) में ठगी में इस्तेमाल किए गए दो प्रमुख मोबाइल नंबरों के धारकों को संदिग्ध आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए थे, ताकि आरोपियों के ठिकाने तक पहुंचा जा सके।

