भुगतान पूरा, फिर भी बंद पड़ी है निगरानी
इसके बावजूद शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक मॉनिटरिंग का काम ठप है। आंकड़ों के मुताबिक:
सर्विलांस कैमरे: कुल 551 में से 70 कैमरे बंद हैं।
रेड लाइट वायलेशन कैमरे: 309 में से 30 काम नहीं कर रहे।
नंबर प्लेट रीडर (ANPR): 64 में से 12 कैमरे ब्लैक आउट हैं।
ट्रैफिक सिग्नल: शहर के 50 प्रमुख सिग्नलों में से 12 बंद पड़े हैं।
लाखों-करोड़ों खर्च करने के बाद भी लाल बत्ती लांघने वालों और बिना नंबर प्लेट दौड़ रही गाड़ियों पर शिकंजा कसना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
पुराने सुधरे नहीं, 11 नए चौराहों का नया प्रस्ताव
व्यवस्था की विडंबना यह है कि जो कैमरे पहले से लगे हैं, उन्हें चालू कराने के बजाय नए कैमरों की मांग भेज दी गई है। पुलिस विभाग ने शहर के 11 प्रमुख चौराहों पर 100 से ज्यादा नए सर्विलांस कैमरे लगाने की सिफारिश शासन को भेजी है। अधिकारियों का तर्क है कि रायपुर का दायरा और गाड़ियों की आवाजाही तेजी से बढ़ी है, लिहाजा नए इलाकों में निगरानी बढ़ाना जरूरी है। फंड मिलते ही इसके टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
9 साल पुराना सिस्टम, अब अपग्रेड की कवायद
रायपुर में आईटीएमएस की शुरुआत साल 2017-18 में हुई थी और सितंबर 2019 से एलएंडटी को इसके मेंटेनेंस की कमान दी गई थी। करीब 9 साल पुराने हो चुके इस ढर्रे को अब आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी चल रही है। नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक होने जा रही है। इसमें आईटीएमएस के तकनीकी विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। बैठक में बंद पड़े कैमरों की स्थिति के साथ-साथ सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन और ट्रैकिंग सिस्टम को एडवांस बनाने पर फैसला लिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि राजधानी के सड़कों पर सुरक्षा के ये 'दावे' कब तक बहाल हो पाते हैं।