महासमुंद जिले में छोटे बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी बड़ी राहत सामने आई है। पिछले करीब दो से तीन महीने से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में रोटावायरस वैक्सीन की कमी बनी हुई थी। अब स्वास्थ्य विभाग को वैक्सीन की नई खेप मिल गई है, जिसे आवश्यकता के अनुसार जिले के विभिन्न ब्लॉकों और टीकाकरण केंद्रों में उपलब्ध कराया गया है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रोटावायरस वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों का टीकाकरण कराने में परेशानी हो रही थी।
कई केंद्रों रोटावायरस वैक्सीन निर्धारित नही
कई केंद्रों पर पहुंचने के बाद भी बच्चों को निर्धारित खुराक नहीं मिल पा रही थी। इससे समय पर टीकाकरण को लेकर अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही थी। जिले में रोटावायरस वैक्सीन की कमी से जुड़ी समस्या को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ और वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की प्रक्रिया तेज की गई। अब नई खेप पहुंचने से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों का टीकाकरण दोबारा सुचारू रूप से हो सकेगा।

स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन उपलब्ध करा दी गई
बीएमओ तारा अग्रवाल ने बताया कि विभाग के पास रोटावायरस वैक्सीन की पर्याप्त डोज पहुंच चुकी हैं। आवश्यकता के अनुसार ब्लॉक के सभी संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन उपलब्ध करा दी गई है। इससे अब अभिभावकों को अपने बच्चों को निर्धारित खुराक दिलाने में परेशानी नहीं होगी। जिले में हर साल लगभग 15 हजार डोज की जरूरत स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, केवल पिथौरा क्षेत्र में सालभर में करीब 3,700 डोज रोटावायरस वैक्सीन की खपत होती है।
लगभग 15 हजार डोज की आवश्यकता पड़ती है
वैक्सीन की उपलब्धता सरकारी आपूर्ति पर निर्भर होने के कारण स्टॉक समाप्त होने पर टीकाकरण प्रभावित हो जाता है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी नागेश्वर राव ने पहले बताया था कि जिले में करीब दो महीने से रोटावायरस वैक्सीन के स्टॉक की समस्या बनी हुई थी। आवश्यक मात्रा में आपूर्ति नहीं मिलने के कारण अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन उपलब्ध नहीं थी। नई खेप आने के बाद अब यह समस्या दूर हो गई है।
बच्चों के लिए क्यों जरूरी है यह वैक्सीन
गंभीर स्थिति में बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। रोटावायरस वैक्सीन संक्रमण की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने में सहायक मानी जाती है। रोटावायरस वैक्सीन बच्चों को गंभीर दस्त और उल्टी से सुरक्षा देने के साथ डिहाइड्रेशन के जोखिम को कम करती है। समय पर खुराक मिलने से अस्पताल में भर्ती होने की आशंका और उपचार पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। मुंह से दी जाने वाली यह वैक्सीन बच्चों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रोटावायरस वैक्सीन मुंह ड्रॉप्स के रूप में दी जाती
रोटावायरस वैक्सीन शिशुओं को मुंह के माध्यम से ड्रॉप्स के रूप में दी जाती है। इसकी निर्धारित खुराक बच्चों को रोटावायरस के कारण होने वाले गंभीर दस्त, डायरिया, उल्टी और पेट के संक्रमण से बचाने में मदद करती है। यह इंजेक्शन के बजाय आसानी से पिलाई जाने वाली वैक्सीन है। छोटे बच्चों में लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी तथा जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की तेजी से कमी हो सकती है।