Sarguja Religious Conversion: चंगाई सभाओं को लेकर विवाद, विहिप ने लगाया मतांतरण का आरोप, जांच की मांग
Sarguja Religious Conversion: लखनपुर और उदयपुर विकासखंड में कथित मतांतरण को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद ने चंगाई सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और कथित नेटवर्क की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की है। प्रशासन ने शिकायत के आधार पर जांच का भरोसा दिया है।
Sarguja Religious Conversion: लखनपुर और उदयपुर विकासखंड के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में
धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंगाई सभाओं की आड़ में कथित तौर पर मतांतरण कराए जाने का गंभीर आरोप लगाया है और इसे लेकर प्रशासनिक व पुलिस अमले से सख्त कार्रवाई की मांग की है। हाल ही में विहिप के प्रखंड अध्यक्ष हरिओम सोनी के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोलते हुए उदयपुर के एसडीएम और थाना प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा है।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन में मुख्य रूप से ग्राम सायर और बड़ेगांव केदमा के कुछ चुनिंदा व्यक्तियों पर निशाना साधा गया है। विहिप का आरोप है कि ये लोग लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और चंगाई प्रार्थना सभाओं की आड़ में भोले-भाले ग्रामीणों को
प्रलोभन देकर या भय दिखाकर उनका मतांतरण करवा रहे हैं। संगठन का दावा है कि यह गतिविधियां छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन हैं और इसके जरिए स्थानीय जनजातीय परिवारों को उनकी मूल सभ्यता और संस्कृति से सुनियोजित तरीके से दूर किया जा रहा है।
पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
विहिप पदाधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की शिकायत सामने आई है। इससे पहले भी इन लोगों के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है और पुलिस द्वारा इन्हें पकड़ा भी गया था। हालांकि, उस वक्त थाने स्तर पर समझाइश देकर इन्हें छोड़ दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी इनके रवैये में कोई सुधार नहीं आया और गतिविधियां जारी रहीं। दूसरी ओर, जब हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने कथित रूप से मतांतरण गतिविधियों में संलिप्त लोगों से संपर्क कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, तो उन्होंने बातचीत से इनकार करते हुए अपने रुख पर कायम रहने की बात कही। उनका तर्क था कि वे अपने मत की अच्छाइयों का प्रचार कर रहे हैं, जो उनका संवैधानिक अधिकार है, और यदि कोई स्वेच्छा से उनकी बात सुनकर अपना मत बदलता है, तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
विहिप की प्रमुख मांगें
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते तनाव और जनमानस में सुलगते आक्रोश को देखते हुए विहिप ने प्रशासन के सामने कई तीखे सवाल और मांगें रखी हैं:
कानूनी कार्रवाई: मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
सुविधाओं से वंचित करने की मांग: जो लोग मतांतरित हो चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के तहत मिलने वाले शासकीय लाभों और सुविधाओं से वंचित किया जाए।
केंद्रीय जांच की संस्तुति: विहिप का मानना है कि इन गतिविधियों के पीछे एक बड़ा और सुनियोजित षड्यंत्र हो सकता है, इसलिए इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से जांच की अनुशंसा की जानी चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विहिप की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।