Stock Market: बाजारों में भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू बाजार में शुक्रवार को जोरदार खरीदारी देखने को मिली, शुरुआती गिरावट से उबरते हुए सेंसेक्स 81,028 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 25,000 का अहम आंकड़ा छू लिया। इस तेजी के चलते निवेशकों की संपत्ति में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय बाजार की यह मजबूती निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही।
अमेरिकी बाजार में AI कंपनियों को लेकर बढ़ी चिंता
भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजारों के प्रदर्शन में अंतर की एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंता रही। अमेरिका में पिछले कुछ समय से AI कारोबार और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। चिप निर्माता कंपनियों, सर्वर, डेटा सेंटर और बिजली आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों ने भारी पूंजी लगाई है।
विदेशी निवेशकों की छह साल में सबसे बड़ी खरीदारी
भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की वापसी को सबसे अहम वजहों में गिना जा रहा है। पिछले कई महीनों से भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी निवेशकों ने अब खरीदारी शुरू कर दी है। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 15,000 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।बाजार में तेजी के पीछे ये पांच बड़े कारण
- शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे पांच प्रमुख वजहें सामने आईं।
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी: FIIs ने एक ही कारोबारी सत्र में करीब 15,000 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
- अमेरिकी AI सेक्टर में अनिश्चितता: AI कंपनियों के भविष्य और संभावित नियामकीय सख्ती को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी।
- भारतीय बाजार की सीमित AI निर्भरता: अमेरिकी AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर भारत की अपेक्षाकृत कम सीधी निर्भरता से घरेलू बाजार को सहारा मिला।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंताएं कम हुईं।
- कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद: भारतीय कंपनियों के बेहतर कारोबारी प्रदर्शन और विदेशी पूंजी की वापसी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
कच्चे तेल की कीमतें घटने से बाजार को मिली राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनकर आई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है। इसका असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये की कीमत पर भी पड़ सकता है।एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली
जहां भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं एशिया के कई प्रमुख बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार में AI और टेक शेयरों की बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक करीब 6 प्रतिशत तक टूट गया। जापान का निक्केई इंडेक्स भी लगभग 6.2 प्रतिशत गिरकर बियर मार्केट के दायरे में पहुंच गया।
भारतीय कंपनियों की कमाई में सुधार से बढ़ा भरोसा
शेयर बाजार की तेजी को केवल विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। भारतीय कंपनियों के कारोबार और मुनाफे में सुधार की उम्मीद भी बाजार को मजबूती दे रही है।












