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Forest officials attacked in Tamora forest area (Image Source: Keertiman Media)
Forest officials attacked in Tamora forest area (Image Source: Keertiman Media)
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Tamora Forest Attack: वन अमले पर हमला, रेंजर और उपवनक्षेत्रपाल को 5 घंटे बनाया बंधक

Tamora Forest Attack: महासमुंद जिले के तमोरा आरक्षित वन क्षेत्र में वनभूमि अतिक्रमण के आरोपियों पर वन अधिकारियों से मारपीट और उन्हें करीब पांच घंटे तक बंधक बनाए रखने का आरोप लगा है। पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

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प्रकाशित: 07 Oct 2026, 01:39 PM · 6 मिनट पढ़ने का समय
बागबाहरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

Tamora Forest Attack: तमोरा के आरक्षित वन क्षेत्र से मंगलवार रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई। वनभूमि पर अतिक्रमण के आरोपियों ने वन अमले को लाठी-डंडों से घेर लिया। इस दौरान वनपरिक्षेत्राधिकारी नवीन वर्मा और उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा के साथ मारपीट कर उन्हें करीब पांच घंटे तक बंधक बनाए रखने का आरोप है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा घेरे में दोनों अधिकारियों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। दोनों अधिकारियों का बाद में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 6 अक्टूबर की रात वनपरिक्षेत्र बागबाहरा के वनपरिक्षेत्राधिकारी नवीन वर्मा अपने हमराह स्टाफ के साथ ढोड परिसर के कक्ष क्रमांक 95-96 में रात्रि गश्त पर थे। टीम में उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा, वनरक्षक टोमन दीवान, वॉचर महेश चंद्राकर, वॉचर पूनम साहू और चालक हरदेव वर्मा शामिल थे। टीम जंगली सुअर के अवैध शिकार और वन्य मांस के अवैध विक्रय की सूचना के आधार पर क्षेत्र में निगरानी कर रही थी।

गाली-गलौज के बाद लाठी-डंडों से घेरा

गश्त के दौरान टीम तमोरा क्षेत्र में पहुंची, जहां वन विभाग के अनुसार वनभूमि पर अतिक्रमण करने वाले कुछ लोगों से उनका सामना हुआ। आरोप है कि संबंधित लोगों ने वन अमले के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट की धमकी देते हुए लाठी-डंडों के साथ वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को घेर लिया। संख्या बल अधिक होने के कारण वन अमले के कुछ कर्मचारी वहां से हटकर सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। इस दौरान रेंजर नवीन वर्मा और उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा मौके पर रह गए।

विभाग का आरोप है कि इसके बाद दोनों अधिकारियों के साथ मारपीट की गई। मारपीट में उन्हें चोटें आईं और रक्तस्राव भी हुआ। वन विभाग ने यह भी बताया है कि मौके पर मौजूद कुछ लोग शराब के नशे में थे। घटना के दौरान रेंजर का पर्स तथा उपवनक्षेत्रपाल का मोबाइल फोन छीन लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

खेत के मकान में ले जाकर बनाया बंधक

मारपीट के बाद दोनों अधिकारियों को तमोरा वनखंड से लगे खेत में स्थित एक छोटे मकान में ले जाया गया। वन विभाग के अनुसार दोनों अधिकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां करीब पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्हें रात करीब 7.30 बजे से 12.30 बजे तक बंधक बनाए रखने की बात सामने आई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनपरिक्षेत्राधिकारी ने बंधक रहते हुए ही व्हाट्सऐप के माध्यम से उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। साथ ही बागबाहरा और खल्लारी थाना प्रभारियों को भी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस विभाग सक्रिय हुआ और वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजा गया।

पुलिस पहुंची तो आरोपियों ने किया विवाद

सूचना के बाद पुलिस बल के साथ बागबाहरा एवं महासमुंद वनपरिक्षेत्र का वन अमला मौके पर पहुंचा। पुलिस और वन अधिकारियों ने संबंधित लोगों से बातचीत कर दोनों अधिकारियों को छोड़ने के लिए समझाइश दी। हालांकि विभाग के अनुसार उन्होंने अधिकारियों को छोड़ने से इनकार कर दिया। इस दौरान पुलिस और वन अमले के साथ भी बहस और विवाद की स्थिति बनी रही। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस एवं वन अमले ने सुरक्षा घेरा बनाया और दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। घटना के बाद दोनों अधिकारियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

समय पर पहुंचा बल, टली गंभीर स्थिति

वन विभाग ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को जिस तरह घेरकर मारपीट की गई और बाद में बंधक बनाया गया, उससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी। विभाग के अनुसार यदि समय पर पुलिस बल और वन अमला मौके पर नहीं पहुंचता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। समय पर पहुंची टीम ने दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालकर संभावित जनहानि की स्थिति को टाल दिया।

पहले भी अतिक्रमण और बाधा के मामले

वन विभाग ने बताया कि तमोरा क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण तथा विभागीय कार्य में बाधा के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। अतिक्रमण के प्रयासों के संबंध में 25 मार्च 2026 को वन अपराध प्रकरण क्रमांक 19940/12, 19940/13, 19940/14, 19940/15 और 19940/16 दर्ज किए गए थे।

इसी क्रम में 13 मई 2026 को वृक्षारोपण के लिए क्षेत्र तैयार करने के दौरान वन अमले के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और शासकीय कार्य में बाधा का मामला सामने आया था। इस संबंध में खल्लारी थाने में 14 मई को FIR क्रमांक 0055/2026 दर्ज कराई गई थी।

इसके बाद वनभूमि पर दोबारा जुताई कर खेती करने तथा लगाए गए बांस और सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को लेकर 20 जुलाई 2026 को वन अपराध प्रकरण क्रमांक 19940/17, 19940/18, 19940/19, 19940/20 और 19940/21 दर्ज किए गए।

दिसंबर 2025 में भी दी गई थी समझाइश

विभाग के अनुसार पिछले वर्षों में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने और वनभूमि की सुरक्षा के लिए लगातार कार्रवाई की जाती रही है। दिसंबर 2025 में भी जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस बल ने संबंधित लोगों को वनभूमि पर अतिक्रमण नहीं करने तथा विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करने की समझाइश दी थी।

साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

वन विभाग ने कहा है कि वर्तमान घटना में शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट, धमकी, शासकीय कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार, सामान छीनने तथा अधिकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के कथनों और अन्य अभिलेखों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्रचलित कानून के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। घटना में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

वन संपदा के संरक्षण के लिए आगे भी की जाएगी कार्रवाई 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनभूमि पर अवैध अतिक्रमण, वन संपदा को नुकसान पहुंचाना, शासकीय कार्य में बाधा डालना तथा शासकीय सेवकों के साथ मारपीट या धमकी देना गंभीर एवं दंडनीय कृत्य हैं। वन विभाग ने कहा कि वनभूमि की सुरक्षा, अतिक्रमण की रोकथाम तथा वन्यजीव और वन संपदा के संरक्षण के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। साथ ही आम नागरिकों से वन क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को देने की अपील की गई है।

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