देश में UPI के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद सरकार के पास UPI ट्रांजैक्शन पर MDR या इससे संबंधित शुल्क लागू करने का अधिकार होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि MDR का संबंध मर्चेंट्स यानी व्यापारियों से है, न कि सामान्य UPI यूजर्स या कंज्यूमर्स से। इसका मतलब है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो मौजूदा प्रस्तावों के मुताबिक यह सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं होगा।
RBI भी भुगतान की लागत पर उठा चुका है सवाल
भारतीय रिजर्व बैंक भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत को लेकर अपनी बात रख चुका है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल में कहा था कि भुगतान व्यवस्था को चलाने में लागत आती है और इसे किसी न किसी को वहन करना होगा। उनके इस बयान के बाद UPI के कुछ कारोबारी लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
MDR पर अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
2,000 रुपये से ज्यादा के बिजनेस पेमेंट पर चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के कुछ बिजनेस पेमेंट पर 0.25 फीसदी से 0.4 फीसदी तक MDR लगाए जाने की संभावना पर चर्चा चल रही है। हालांकि इसकी दर, ट्रांजैक्शन की सीमा और किन मर्चेंट्स को इसके दायरे में रखा जाएगा, इसे लेकर आधिकारिक फैसला सामने आना बाकी है।
UPI भुगतान में P2M की बड़ी हिस्सेदारी
करीब 67 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन आ सकते हैं दायरे में
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने की स्थिति में वैल्यू के हिसाब से करीब 67 फीसदी P2M भुगतान इसके दायरे में आ सकते हैं। जुलाई के आंकड़ों के आधार पर ऐसे लेनदेन की राशि करीब 5.80 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।
जुलाई में 29.88 लाख करोड़ रुपये का UPI लेनदेन
जुलाई में देशभर में UPI के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा दिखाता है कि रोजमर्रा के भुगतान से लेकर कारोबारी लेनदेन तक UPI की भूमिका लगातार बढ़ रही है।